नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स.)। केन्द्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने सोमवार को कहा कि अमेरिका में स्थापित वेयरहाउस मॉडल पर जल्द यूरोप (विशेषकर जर्मनी) में भी काम होगा, जिससे भारतीय कारीगर सीधे वैश्विक बाजार से जुड़ सकेंगे।

गिरिराज सिंह ने यह बात आज नई दिल्ली स्थित ‘हैंडलूम हाट’ में राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) के 43वें स्थापना दिवस और हथकरघा प्रदर्शनी के उद्घाटन पर कही। इसका उद्देश्य हथकरघा विरासत को बढ़ावा देने और बुनकरों की आजीविका को सशक्त बनाना था।

उन्होंने कहा, ईपीसीएच के सहयोग से अमेरिका में ‘हब एंड स्पोक’ मॉडल के आधार पर वेयरहाउस स्थापित कर स्थानीय दुकानों को जोड़ा गया है, जिससे हस्तशिल्प और हथकरघा कारीगर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सकेंगे। इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए अब कारीगरों को कंप्यूटर के साथ-साथ एआई का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि कार्यक्रम में पारंपरिक कला को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर कारीगरों की आय बढ़ाने और वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाएंगे।
उन्होंने प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साझा करते हुए कहा कि अब लक्ष्य केवल कारीगरों का गुजारा करना नहीं, बल्कि उन्हें समृद्ध बनाना है। इस कड़ी में ‘दशलखिया दीदी’ और ‘दशलखिया भैया’ कार्यक्रम की घोषणा की गई। इसका मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र से जुड़े परिवारों की वार्षिक आय को 5 से 10 लाख रुपये तक पहुंचाना है।
डिजिटल इंडिया की सफलता का जिक्र करते हुए मंत्री ने कहा कि आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में विश्व में प्रथम है।
उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की 10.5 करोड़ दीदियों को हाल ही में 4 घंटे की एआई प्रशिक्षण दिया गया है। अब यही प्रशिक्षण हथकरघा बुनकरों को भी दिया जायेगा ताकि वे निर्यात बाजार और पैकेजिंग की बारीकियां समझ सकें। सिल्क अब केवल साड़ियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर ‘ड्रेस मटेरियल’ के रूप में प्रमोट किया जाएगा। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए टेक्सटाइल क्षेत्र में ‘रिसाइकल कॉटन’ और पीईटी बोतल फाइबर के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंत्री ने जूट, विस्कोस, रेमी, बैम्बू मैकेनिकल फाइबर, बनाना और पाइनएप्पल फाइबर जैसे ‘न्यू एज फाइबर’ को भविष्य की जरूरत बताया।
केंद्रीय मंत्री ने हथकरघा हाट के प्रदर्शनी क्षेत्र का भी दौरा किया, इसमें 60 स्टॉल 48 हथकरघा और 12 हस्तशिल्प स्टॉल लगे हुए हैं।
एनएचडीसी के एमडी राजीव अशोक ने कहा कि कारीगरों के बेहतर प्रबंधन के लिए भविष्य निधि खाता अगले महीने ईपीएफओ को सौंप दिया जाएगा। कर्मचारियों के लिए स्वास्थ योग और वित्तीय साक्षरता जैसे कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है।
उन्होंने कहा कि भारत में लगभग 1 करोड़ परिवार हथकरघा और हस्तशिल्प से सीधे जुड़े हैं। यूरोप के साथ केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक संबंधों को भी मजबूती दी जा रही है।
राजीव ने कहा कि मंत्रालय के मार्गदर्शन, विकास आयुक्त हस्तशिल्प कार्यालय के सहयोग, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के सहयोग और हमारे कर्मचारियों के समर्पण से, एनएचडीसी एक आधुनिक, पारदर्शी और प्रभावशाली संस्थान की तरह विकसित होगा, जो परंपरा में मजबूती से जुड़े रहकर आत्मविश्वास के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ाएगा।
कार्यक्रम के दौरान ‘आमा हर्बल्स’ के सहयोग से सस्टेनेबल डिज़ाइन का प्रदर्शन किया गया। डिज़ाइनर अदिति और जग्गी रस्तोगी की टीम द्वारा प्रस्तुत डिज़ाइनों ने आधुनिकता और परंपरा के अद्भुत मेल को दर्शाया।
इस मौके पर अलग अलग उत्पाद बनाने वाले हस्त शिल्पकारों को पुरष्कार से सम्मानित किया गया। हथकरघा विरासत पर आधारित एक बहुभाषी कॉमिक बुक का विमोचन भी किया गया।
इस अवसर पर वस्त्र मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव, डॉ. एम. बीना, विकास आयुक्त (हथकरघा) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी
