
बरेली, 17 अप्रैल (हि.स.) । भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर में शुक्रवार को प्लेसमेंट एवं काउंसलिंग सेल और छात्र कल्याण कार्यालय के संयुक्त तत्वावधान में एक प्रेरणादायी इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। पशु पोषण विभाग के समिति कक्ष में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कॉर्प्स (आरवीसी) के वरिष्ठ अधिकारियों ने छात्रों से संवाद करते हुए उन्हें करियर की संभावनाओं और भर्ती प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी।

कार्यक्रम में संस्थान के प्राध्यापकों, अधिकारियों और बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। संवादात्मक सत्र के दौरान छात्रों ने खुलकर प्रश्न पूछे और आरवीसी में करियर, चयन प्रक्रिया तथा कार्य के स्वरूप को लेकर अपनी जिज्ञासाएं साझा कीं। अधिकारियों ने भी सहजता से सभी सवालों के जवाब दिए, जिससे यह सत्र छात्रों के लिए बेहद ज्ञानवर्धक और प्रेरणादायी साबित हुआ।
मुख्य अतिथि ब्रिगेडियर अजय सिंह (ब्रिग आरवीएस), मुख्यालय सेंट्रल कमांड ने अपने संबोधन में पशु चिकित्सा पेशे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह क्षेत्र न केवल देश के कृषि और पशुधन विकास में अहम भूमिका निभाता है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी इसकी उपयोगिता बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश करना “ज्ञान के मंदिर” में आने जैसा है, जहां से व्यक्ति के जीवन की मजबूत नींव तैयार होती है।
ब्रिगेडियर सिंह ने संस्थान की हालिया उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि रैंकिंग, ग्रेडिंग और प्लेसमेंट में आई प्रगति छात्रों के समर्पण और शिक्षकों की मेहनत का परिणाम है। उन्होंने छात्रों को अपने चुने हुए पेशे पर गर्व करने की सीख देते हुए कहा कि आत्मविश्वास की कमी सफलता में सबसे बड़ी बाधा बनती है। ऐसे में जरूरी है कि विद्यार्थी अपने करियर को लेकर पूरी निष्ठा और गर्व के साथ आगे बढ़ें।
उन्होंने यह भी कहा कि पशु चिकित्सा एक ऐसा क्षेत्र है, जिसमें अपार संभावनाएं हैं। यदि इस पेशे को समर्पण और लगन के साथ अपनाया जाए, तो व्यक्ति न केवल व्यक्तिगत सफलता हासिल कर सकता है, बल्कि समाज और देश की सेवा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है।
इस अवसर पर संयुक्त निदेशक (शैक्षणिक) डॉ. एस. के. मेंदीरत्ता ने पशु चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्ध विविध कैरियर विकल्पों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना की आरवीसी में युवाओं के लिए अनेक अवसर मौजूद हैं, जहां वे देश सेवा के साथ-साथ अपने पेशेवर कौशल को भी निखार सकते हैं।
डॉ. मेंदीरत्ता ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि सेना में सेवाएं न केवल व्यक्तिगत विकास का मार्ग प्रशस्त करती हैं, बल्कि परिवार के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और सामाजिक सुरक्षा भी सुनिश्चित करती हैं। उन्होंने छात्रों को आरवीसी में अधिक से अधिक आवेदन करने के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि चयन न होने की स्थिति में भी यह अनुभव आत्मविश्वास बढ़ाने में सहायक होता है।
कार्यक्रम की शुरुआत परीक्षा नियंत्रक एवं शैक्षणिक समन्वयक डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह के स्वागत भाषण से हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि का परिचय कराया। इस दौरान डॉ. रूपसी तिवारी, कर्नल डी. एस. दलाल, कर्नल जलविंदर सिंह, लेफ्टिनेंट कर्नल एम. के. भट्ट, डॉ. रजत गर्ग, डॉ. नारायण दत्ता और डॉ. अंजू काला सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. अभिषेक, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी, प्लेसमेंट एवं काउंसलिंग सेल ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन छात्र कल्याण अधिकारी (छात्र) डॉ. एस. के. साहा ने प्रस्तुत किया। आयोजन के अंत में छात्रों ने इसे उपयोगी बताते हुए ऐसे और कार्यक्रमों की अपेक्षा जताई।
हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार
