शिमला, 02 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर हिमाचल प्रदेश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विनय कुमार ने बजट को हिमाचल विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि इस बजट में आपदा से बुरी तरह प्रभावित हिमाचल प्रदेश को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है और किसी भी वर्ग को न तो कोई ठोस राहत दी गई है और न ही कोई सीधा लाभ मिला है।

विनय कुमार ने सोमवार को प्रेस वार्ता में कहा कि हाल के वर्षों में प्राकृतिक आपदाओं से हिमाचल को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। केंद्र सरकार की टीम के आकलन के मुताबिक प्रदेश को करीब 20 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। ऐसे में राज्य को 16वें वित्त आयोग से राहत और राजस्व घाटा अनुदान (आरडीजी) में बढ़ोतरी की उम्मीद थी, लेकिन इसके उलट बजट में आरडीजी को घटाकर शून्य कर दिया गया। उन्होंने कहा कि रिवेन्यू डिफिसिट ग्रांट हिमाचल का अधिकार है और इसे खत्म करना प्रदेश के साथ अन्याय है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि बजट में रोजगार सृजन को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की गई है और मनरेगा जैसी योजना को लगभग खत्म कर देने जैसा रवैया अपनाया गया है। उन्होंने कहा कि पर्यटन के नाम पर भी केवल दिखावा किया गया है। जिन ट्रैकिंग रूट्स की बात बजट में की गई है, वे हिमाचल में पहले से मौजूद हैं और इससे प्रदेश को कोई नई दिशा नहीं मिलती।
रेलवे विस्तार को लेकर भी विनय कुमार ने निराशा जताई। उन्होंने कहा कि इस बजट में हिमाचल के लिए रेलवे के क्षेत्र में कोई नई सौगात नहीं दी गई। लंबे समय से लंबित बिलासपुर-भानुपल्ली रेल लाइन का मुद्दा एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुल मिलाकर बजट में हिमाचल के साथ सौतेला व्यवहार किया गया है।
विनय कुमार ने प्रदेश से चुने गए भाजपा सांसदों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सांसद अनुराग ठाकुर का रवैया ऐसा प्रतीत होता है जैसे उन्होंने न तो बजट को ठीक से सुना और न ही पढ़ा। उन्होंने कहा कि हिमाचल के लिए पिछला दिन काला दिन था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश को 1500 करोड़ रुपये की आपदा राहत तक नहीं दी गई और यह बजट केवल औपचारिकता बनकर रह गया है, जिसमें किसी भी वर्ग को न तो खास लाभ मिला है और न ही कोई राहत।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस इस अन्याय को चुपचाप स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने बताया कि आगामी बजट सत्र में इस मुद्दे को लेकर विधानसभा में प्रस्ताव लाया जाएगा और भाजपा नेताओं से भी मांग की जाएगी कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर हिमाचल के हितों को केंद्र सरकार के सामने मजबूती से रखें।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
