सुलतानपुर, 14 मार्च (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के जिला सुलतानपुर मे चिन्मय मिशन ज्ञान यज्ञ अंतर्गत राम चरित मानस आधारित श्रीराम व चतुश्लोकी भागवत का शुभारंभ हुआ। यह प्रवचन 14 से 18 मार्च तक दो समय सुबह और शाम में चलेगा।

शहर के पंडित राम नरेश त्रिपाठी सभागार में पांच दिवसीय ज्ञान यज्ञ को चिन्मय मिशन नासिक के आचार्य स्वामी अद्वैतानंद ने संबोधित किया। चिन्मय मिशन नासिक के आचार्य स्वामी अद्वैतानंद ने कहा कि श्रीराम जी का चरित्र आदर्श है। इसमें गोस्वामी जी ने नाम, रूप, गुण, लीला, धाम का विस्तृत वर्णन है। मानस की सुंदरता हिंदी में ही है। इसकी लोकप्रियता कभी कम नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि राम चरित मानस में श्रीराम के नाम की महिमा गाई है। श्रीराम का नाम लेने से उनका पूरा स्वरूप आ जाता है। श्रीराम कुछ बोलने के पहले मुस्कुराते थे जिससे सामने वाला कितना भी दुखी परेशान हो उसके मुख पर भी मुस्कान आ ही जाती है।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या भारती के क्षेत्रीय सहसंगठन मंत्री डॉ राम मनोहर ने दीप प्रज्जलित करके किया। मुख्य अतिथि के रूप में विद्या भारती के क्षेत्रीय सहसंगठन मंत्री डॉ राम मनोहर ने कहा कि दुनिया का हर वर्ग मानव के सुख के लिए लगा है। जीवन के चारों अवस्थाओं का आचरण निश्चित है। ज्ञान ही ऐसा है जिसका आचरण निश्चित नहीं है। इसके लिए बहुत बड़े बड़े संतों ने प्रयास किया किंतु अभी भी यह प्रयास जारी है। शिक्षा में बेतहाशा वृद्धि हुई। तमाम संसाधन बढ़े है। साधनों के पीछे दुनिया तेजी से बढ़ रही है। इसके बाद भी सुखों में वृद्धि उतनी नहीं हुई। इंद्रियों के अधीन न होकर समझ के साथ आगे बढ़े, यही समाज की देन है।
उन्होंने कहा कि आज जब लोगों से सवाल किया जाता है कि आपको बच्चा क्यों चाहिए तो लोग बोलते हैं कि हमें बच्चा अपने वंश वो अपनी बुढ़ापे के सहारे के लिए चाहिए। उन्होंने एक सवाल करते हुए कहा कि ‘बच्चा बाई चांस नहीं, बाई च्वाइस’ चुने। उसे अपनी बुढ़ापे की लाठी और वंश वृद्धि के लिए नहीं बल्कि ऋण से मुक्ति के लिए चाहिए। अतिथियों का स्वागत एवं आभार चिन्मय मिशन के संरक्षक डॉ जे0 पी0 सिंह ने किया।
हिन्दुस्थान समाचार / दयाशंकर गुप्त
