जयपुर, 13 मार्च (हि.स.)। संरक्षित रेल संचालन के लिए रेलवे द्वारा अत्याधुनिक तकनीक व नवाचरों का उपयोग किया जा रहा है। संरक्षित रेल संचालन में अत्याधुनिक और अपग्रेड सिगनल प्रणाली की अहम भूमिका है। उत्तर पश्चिम रेलवे पर संरक्षा सुदृढ़ करने के लिए टक्कररोधी प्रणाली कवच प्रणाली का कार्य प्रगति पर है।

उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी अमित सुदर्शन के अनुसार उत्तर पश्चिम रेलवे के 5561 किलोमीटर रेल मार्ग में लगभग 2300 करोड़ रूपये की लागत के साथ स्वदेशी कवच प्रणाली का कार्य स्वीकृत है। उत्तर पश्चिम रेलवे के सभी मण्डलों में कवच प्रणाली स्थापित करने के कार्य को स्वीकृति प्रदान की गई है। रेल संचालन में संरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए अत्याधुनिक कवच 4.0 प्रणाली स्थापित की जाएगी।
उत्तर पश्चिम रेलवे में 1586 रेल किलोमीटर रेल मार्ग पर ऑप्टिकल फाइबर केबल कार्य के लिए टेंडर जारी किया जा चुके है तथा इसका लगभग 56 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही स्टेशन कवच के लिए भी टेंडर जारी किया जा चुके है तथा सर्वे और ड्रॉइंग तैयार करने के कार्य प्रगति पर है। इस प्रणाली के अंतर्गत कुल 250 टावरों की स्थापना की जानी है, जिनमें से 221 टावरों का कार्य वर्तमान में प्रगति पर है।
अमित सुदर्शन ने बताया कि कवच एक अत्यंत जटिल प्रणाली है। कवच का चालू होना एक दूरसंचार कंपनी स्थापित करने के बराबर है।
उत्तर पश्चिम रेलवे पर कवच की स्थापना के कार्य तीव्र गति से प्रगति पर है और इनको लक्ष्यानुसार करने के लिए रेलवे द्वारा लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। रेलवे संरक्षा के लिए प्रतिबद्व है और संरक्षित रेल संचालन के लिए अत्याधुनिक प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजीव
