कानपुर, 10 फरवरी (हि.स.)। आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस, ऑटोनोमस सिस्टम्स और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसी उभरती तकनीकें सैन्य संचालन के तरीकों को तेजी से बदल रही हैं, जिससे रक्षा तकनीकों का आधुनिकीकरण आवश्यक हो गया है।

आईआईटी कानपुर एआई साइबर सुरक्षा और मानव-रहित ऑटोनोमस सिस्टम्स जैसे क्षेत्रों में अग्रणी अनुसंधान कर रहा है और वास्तविक सैन्य आवश्यकताओं के अनुरूप नवोन्मेषी समाधान प्रदान करने में सक्षम है। यह बातें मंगलवार को आईआईटी कानपुर निदेशक प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने कही।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर को भारतीय सेना के उप सेनाध्यक्ष (वाईस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ), लेफ्टिनेंट जनरल पुष्पेंद्र सिंह की संस्थान परिसर में उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सिंह का स्वागत आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल, डीन (अनुसंधान एवं विकास) प्रो. तरुण गुप्ता तथा नोडल फैकल्टी प्रभारी प्रो. कांतेश बालानी द्वारा किया गया।
इस अवसर पर हुई महत्वपूर्ण चर्चाओं में भारतीय सेना में तकनीक-आधारित आधुनिकीकरण के लिए आईआईटी कानपुर और भारतीय सेना के बीच संयुक्त सहभागिता की आवश्यकता पर विशेष ज़ोर दिया गया।
इस दौरान उप सेनाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग विभाग के अंतर्गत प्रो. अभिषेक के नेतृत्व में संचालित हेलीकॉप्टर एवं वीटीओएल प्रयोगशाला तथा प्रो. सुभ्रमण्यम साडेरला के नेतृत्व में यूएवी प्रयोगशाला का भी भ्रमण किया, जहाँ उन्हें आईआईटी कानपुर द्वारा ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में की गई प्रगति से अवगत कराया गया। उन्होंने C3iHub का भी दौरा किया, जहां C3iHub, आईआईटी कानपुर के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी डॉ. रस द्विवेदी तथा मुख्य रणनीति अधिकारी डॉ. आनंद हांडा के साथ मिलकर नवीनतम साइबर सुरक्षा विकासों पर चर्चा की।
उप सेनाध्यक्ष ने विशिष्ट प्रौद्योगिकियों के विकास की दिशा में आईआईटी कानपुर द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की तथा विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय सेना और आईआईटी कानपुर के बीच बढ़ती सहभागिता निकट भविष्य में अत्याधुनिक स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के विकास का मार्ग प्रशस्त करेगी।
यह दौरा राष्ट्रीय रक्षा नवाचार के क्षेत्र में आईआईटी कानपुर के बढ़ते योगदान को रेखांकित करते हुए भारतीय सेना के साथ गहन एवं सुदृढ़ सहयोग की नई संभावनाओं को सामने लाता है।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
