इंदौर, 27 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) के बाहर चार दिनों से चल रहा अभ्यर्थियों का धरना मंगलवार शाम समाप्त हो गया। आयोग के किसी भी जिम्मेदार अधिकारी के ज्ञापन लेने नहीं पहुंचने पर छात्रों ने अपना ज्ञापन एमपीपीएससी कार्यालय के बाहर चस्पा कर दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने बेरोजगारी खत्म करने की शपथ ली और आयोग व सरकार की उदासीनता के विरोध में कुछ देर मौन धारण किया।

यह धरना नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के नेतृत्व में दिया जा रहा था। मप्र हाईकोर्ट की अनुमति के बाद 24 जनवरी से एमपीपीएससी परिसर के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया गया, जो मंगलवार दोपहर बाद समाप्त हुआ।

13 महीने पहले भी हुआ था आंदोलन
गौरतलब है कि दिसंबर 2024 में भी सैकड़ों एमपीपीएससी अभ्यर्थियों ने इसी तरह का आंदोलन किया था, जो लगभग एक सप्ताह तक चला था। उस समय जिला प्रशासन ने कई मांगें मानने का आश्वासन देकर धरना समाप्त कराया था। हालांकि अभ्यर्थियों का आरोप है कि तब किए गए अधिकांश वादे आज तक पूरे नहीं हुए।
हाईकोर्ट से मिली थी सशर्त अनुमति
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन ने 22 से 28 जनवरी तक एमपीपीएससी कार्यालय के बाहर धरना देने की अनुमति मांगी थी, जिसे प्रशासन ने खारिज कर दिया था। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान माना कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने प्रशासन के आदेश को आंशिक रूप से निरस्त करते हुए 24 जनवरी से 27 जनवरी 2026 दोपहर तक शर्तों के साथ प्रदर्शन की अनुमति दी थी। कोर्ट के आदेश के अनुसार, 26 जनवरी को सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक गणतंत्र दिवस कार्यक्रम के चलते प्रदर्शन स्थगित रखा गया। साथ ही निर्देश दिए गए थे कि 27 जनवरी को दोपहर 12 बजे एमपीपीएससी के सक्षम अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर धरना समाप्त किया जाए।
अधूरी मांगों को लेकर नाराजगी बरकरार
नेशनल एजुकेटेड यूथ यूनियन के संयोजक राधे जाट ने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। अभ्यर्थियों का कहना है कि पिछले आंदोलन में जिन 6–7 मांगों को मानने की बात कही गई थी, उनमें से केवल दो पर ही अमल हुआ है। करीब 90 प्रतिशत मांगें अब भी लंबित हैं। अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग स्टेट सर्विस परीक्षा के इंटरव्यू अंकों को लेकर है। उनका कहना है कि 185 अंकों का इंटरव्यू अत्यधिक है, जिससे चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित होती है। इसे घटाकर 100 अंक किया जाना चाहिए। अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया है कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होने की स्थिति में वे आगे भी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे
