सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवहार व अनुसंधान पर विद्यार्थियों को किया जाएगा तैयार

जोधपुर, 29 जनवरी (हि.स.)। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) जोधपुर के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में मास्टर ऑफ पब्लिक हेल्थ कार्यक्रम के नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत किया गया। इस अवसर पर एमपीएच के 10वें बैच के शुभारंभ के साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कुशल मानव संसाधन विकसित करने की संस्थान की एक दशक लंबी प्रतिबद्धता का भी उत्सव मनाया गया।

एम्स जोधपुर के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ में संचालित एमपीएच कार्यक्रम एक बहु-विषयक पाठ्यक्रम है, जिसमें रोग निवारण, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण तथा स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने पर विशेष बल दिया जाता है। पाठ्यक्रम में स्वास्थ्य नीति, स्वास्थ्य अर्थशास्त्र, स्वास्थ्य प्रणाली सुदृढ़ीकरण, स्वास्थ्य सूचना विज्ञान, जैव-नैतिकता, स्वास्थ्य संवर्धन, स्वास्थ्य प्रणाली अनुसंधान, कार्यक्रम प्रबंधन तथा व्यावसायिक स्वास्थ्य जैसे प्रमुख विषय शामिल हैं। यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवहार, अनुसंधान एवं शासन के क्षेत्र में नेतृत्वकारी भूमिकाओं के लिए तैयार करता है। अब तक स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ से 121 एमपीएच स्नातक उत्तीर्ण हो चुके हैं, जो राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर पर विभिन्न सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
उद्घाटन सत्र को कार्यकारी निदेशक डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी, डीन अकादमिक डॉ. प्रतिभा सिंह, आईसीएमआर-एनआईआईआरएनसीडी के निदेशक डॉ. पंकज भारद्वाज, डीन परीक्षा डॉ. गोपाल कृष्ण बोहरा, उप-डीन छात्र कल्याण डॉ. नरेश नेहबिनानी तथा सहायक डीन अनुसंधान डॉ. दीपक शर्मा ने संबोधित किया। उन्होंने सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा के महत्व तथा वर्तमान परिप्रेक्ष्य में इसकी बढ़ती प्रासंगिकता पर अपने विचार साझा किए। एमपीएच कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. मनोज कुमार गुप्ता ने एमपीएच पाठ्यक्रम को नैदानिक चिकित्सा और सामुदायिक स्वास्थ्य के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए, सूचित नीति एवं व्यवहार के माध्यम से जनसंख्या स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश
