जयपुर, 05 अप्रैल (हि.स.)। अजमेर रोड स्थित ठिकरिया आश्रम में रविवार को आयोजित सत्संग कार्यक्रम में बाबा उमाकांत महाराज ने वर्तमान समय की परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा समय आने वाला है जब एक मिनट में नास्तिक को भी भगवान याद आ जाएगा।

सत्संग में सैकड़ों श्रद्धालु गुलाबी वस्त्र धारण कर शामिल हुए। बाबा उमाकांत महाराज, जो बाबा जयगुरुदेव महाराज के आध्यात्मिक उत्तराधिकारी हैं, ने कहा कि समाज में दया की भावना कम होती जा रही है, जिसका मुख्य कारण दूषित आहार और मांसाहार की बढ़ती प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि जब अन्न शुद्ध नहीं रहेगा तो मनुष्य के भीतर से दया समाप्त हो जाएगी, और दया के बिना धर्म का अस्तित्व संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्म के अभाव में कर्म भी खराब हो जाते हैं और फिर व्यक्ति को उसके दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। ऐसे में केवल पूजा-पाठ या तीर्थ करने से लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि जीवों पर दया करना ही सच्चा धर्म है।
बाबा उमाकांत महाराज ने कहा कि आज प्रकृति भी मानव के कृत्यों से नाराज है। उन्होंने बताया कि वायु, अग्नि और पृथ्वी जैसे पंचतत्व मानव द्वारा किए जा रहे प्रदूषण और विनाशकारी गतिविधियों से प्रभावित हो रहे हैं, जिससे भविष्य में विभिन्न प्रकार की आपदाएं आ सकती हैं।
विश्व स्तर पर बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया के हालात पर उन्होंने कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। उन्होंने बड़े देशों से अपील की कि वे हथियार बनाने की बजाय छोटे देशों के विकास में सहयोग करें, जिससे विश्व में शांति स्थापित हो सके। सत्संग के दौरान उन्होंने ‘जय गुरु देव’ नाम को वर्तमान समय का जागृत मंत्र बताते हुए कहा कि इसका स्मरण करने से संकटों से रक्षा हो सकती है। उन्होंने श्रद्धालुओं से इस संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का आह्वान किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश
