
नई दिल्ली, 18 मार्च (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रेल लाइनों में से एक कांगड़ा घाटी रेल लाइन पठानकोट-जोगिंदर नगर एक बार फिर अपनी रफ्तार पकड़ने को तैयार है। करीब चार वर्ष पूर्व पठानकोट के समीप चक्की खड्ड पर बाढ़ के कारण रेलवे पुल का एक पिल्लर ढह जाने से पठानकोट से जोगिंदर नगर रेल लाइन पर ट्रेन की आवाजाही बंद हो गई थी। हालांकि हिमाचल के हिस्से में ट्रेन चल रही थी। लोकसभा सांसद अनुराग सिंह ठाकुर द्वारा उठाए गए सवाल पर संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस रेल खंड पर आपदा के कारण आई बाधाओं को दूर कर लिया गया है और अब इसके भविष्य को लेकर बड़े बदलाव की तैयारी है।

अगस्त 2022 में हुई भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं के कारण चक्की खड्ड स्थित पुल संख्या 32 (डलहौजी रोड और नूरपुर रोड के बीच) के पिलर बह गए थे, जिससे पठानकोट और नूरपुर रोड के बीच रेल संपर्क पूरी तरह टूट गया था।
रेल मंत्री ने बताया कि इस महत्वपूर्ण पुल का पुनर्निर्माण कार्य अब पूरा कर लिया गया है और पठानकोट से जोगिंदर नगर तक का पूरा ट्रैक ट्रेन संचालन के लिए पूरी तरह फिट है। वर्तमान में इस खंड पर सुरक्षा और मजबूती के अन्य दीर्घकालिक कार्य भी तेजी से चल रहे हैं।
वर्तमान में यात्रियों की सुविधा के लिए इस मार्ग पर तीन जोड़ी ट्रेनें संचालित की जा रही हैं। इनमें बैजनाथ पपरोला से जोगिंदर नगर के बीच एक और बैजनाथ पपरोला से कांगड़ा के बीच दो जोड़ी पैसेंजर ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों के चलने से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से ट्रैक की बहाली का इंतजार कर रहे थे।
200 किलोमीटर नैरो गेज लाइन अब होगी ब्रॉडगेज
वही क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने इस 200 किलोमीटर लंबी नैरो गेज लाइन को ब्रॉडगेज (बड़ी लाइन) में बदलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। इसके लिए ‘गेज कन्वर्जन सर्वे’ को मंजूरी दे दी गई है और वर्तमान में फील्ड सर्वे का काम जारी है। इस सर्वे के आधार पर एक विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी, जिससे भविष्य में इस दुर्गम इलाके में बड़ी ट्रेनों के संचालन का रास्ता साफ होगा।
कांगड़ा घाटी रेल लाइन को यूनेस्को की संभावित विरासत सूची में मिला स्थान
रेल मंत्री के अनुसार वर्तमान में यूनेस्को की ‘माउंटेन रेलवे ऑफ इंडिया’ सूची में दार्जिलिंग, कालका-शिमला और नीलगिरी रेलवे शामिल हैं। कांगड़ा घाटी रेलवे की अनूठी इंजीनियरिंग और प्राकृतिक सुंदरता को देखते हुए यूनेस्को ने इसे अपनी ‘संभावित विरासत सूची में स्थान दिया है। सरकार इसे विश्व धरोहर का दर्जा दिलाने के लिए आवश्यक मानकों पर काम कर रही है।
उधर सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह के कारण हिमाचल प्रदेश में रेल सेवाओं के विस्तार को पिछले 12 वर्षों में नई गति मिली है। नए प्रोजेक्टों की मंजूरी से लेकर पुराने प्रोजेक्टों की फंडिंग बढ़ाने में मोदी सरकार का विशेष योगदान रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
