कोण्डागांव, 05 अप्रैल (हि.स.)। जिले में राज्य शासन की पुनर्वास नीति के तहत हिंसा का मार्ग छोड़कर मुख्यधारा में लौटे पुनर्वासितों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल की जा रही है। जिले में स्थापित पुनर्वास केंद्र ऐसे लोगों के लिए आशा का केंद्र बन गया है। जिले में वर्तमान में 48 पुनर्वासित व्यक्ति हैं, जिन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण भी प्रदान किया जा रहा है।

इन प्रशिक्षणों में असिस्टेंट शटरिंग कारपेंटर, गार्डनर, वाहन मैकेनिक, इलेक्ट्रिशियन और सिलाई-कढ़ाई जैसे रोजगारोन्मुखी कौशल शामिल हैं, जो उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार दिए जा रहे हैं। प्रथम चरण में 38 व्यक्तियों को विभिन्न कौशलों में प्रशिक्षित किया जा चुका है। वर्तमान में लाईवलीहुड कॉलेज में 10 पुनर्वासित व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिनमें 7 सिलाई और 3 इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें तकनीकी दक्षता के साथ-साथ आत्मविश्वास भी प्रदान कर रहा है।
हाड़ोबाई सोडी ने बताया कि वे सिलाई-कढ़ाई सीख रही हैं, प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपने गांव लौटकर स्वयं का रोजगार शुरू कर आत्मनिर्भर जीवन जीना चाहती हैं। मोहन कोर्राम, जो 2004 में माओवादी संगठन से जुड़े थे, अब सिलाई का प्रशिक्षण ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस कौशल से अपने गांव में स्वरोजगार स्थापित कर शांतिपूर्ण जीवन बिताना चाहते हैं। राज्य शासन पुनर्वासित व्यक्तियों को प्रशिक्षण के अतिरिक्त आवास, स्वास्थ्य, शिक्षा और स्वरोजगार के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ भी प्रदान कर रहा है। यह पहल उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
