
खूंटी, 08 अप्रैल (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर संघ की एक टोली की ओर से सेवा वर्ष के तहत जनसेवा का विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की प्रेरणा अविभाजित भारत (अब पाकिस्तान) के दो स्वयंसेवकों और डीएवी शिक्षा क्रांति के पुरोधा महात्मा नारायण दास ग्रोवर और उनके भाई, पीजीआई चंडीगढ़ के प्रख्यात नेत्र सर्जन रहे डॉ अर्जुन दास ग्रोवर से ली गई है।

कार्यक्रम का नेतृत्व 91 वर्षीय वरिष्ठ स्वयंसेवक पद्मभूषण कड़िया मुंडा और डॉ राजमोहन कर रहे हैं।
सेवा अभियान के तहत खूंटी, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम और ग्रामीण रांची के 111 गांवों में मोतियाबिंद पीड़ितों की पहचान कर उन्हें अस्पताल लाकर नि:शुल्क सर्जरी और फॉलोअप की व्यवस्था की जा रही है। प्रत्येक चयनित राजस्व ग्राम से लगभग 15–20 मरीजों को लाकर ऑपरेशन कराया जा रहा है। इसकी जानकारी देते हुए एसजीवीएस अस्पताल के निदेशक डॉ निर्मल सिंह ने बुधवार को बताया कि
इस अभियान के तहत अब तक 07 गांवों के बिरसाइत समाज के 115 से अधिक मरीजों की मोतियाबिंद सर्जरी की जा चुकी है। मरीजों को अस्पताल तक लाने–ले जाने, भोजन, दवा, वस्त्र (साड़ी, धोती, कंबल) और ऑपरेशन से पहले और बाद की सभी सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई मरीजों को 50 से 245 किलोमीटर दूर से लाकर इलाज कराया गया।
अभियान में अब तक 17 नेत्र सर्जनों ने मानद सेवाएं दी हैं। इनमें जनजातीय सर्जन डॉ दीपक मर्यानुस लकड़ा, डॉ सानूवेल अमन टोपनो, शंकर नेत्रालय के डॉ समीर और डॉ आबिद सहित अन्य चिकित्सक शामिल हैं। चंडीगढ़ स्थित ग्रोवर आई हॉस्पिटल के रेटिना विशेषज्ञ डॉ रोहित ग्रोवर और डॉ अंशु ग्रोवर भी ऑनलाइन परामर्श के माध्यम से सहयोग दे रहे हैं। वर्तमान में सप्ताह में तीन दिन सर्जरी का कार्य किया जा रहा है और प्रतिदिन औसतन 7 से 10 नि:शुल्क ऑपरेशन हो रहे हैं।
इसके साथ ही 11 जनजातीय गांवों में हनुमान जी की मूर्ति स्थापना और स्वावलंबन कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। गोयलकेरा, गुदड़ी और सारंडा जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बिरसाइत प्राथमिक विद्यालय परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा के पास राम दरबार और हनुमान जी की संगमरमर प्रतिमा स्थापित की जा रही है। यहां हर गुरुवार को मुंडारी भाषा में हनुमान चालीसा का पाठ भी किया जाएगा।
डॉ निर्मल सिंह ने बताया कि वर्ष 1985 से 2025 के बीच इस पहल के माध्यम से 78 युवा नेत्र सर्जनों को एसआईसीएस नेत्र शल्य तकनीक में प्रशिक्षित किया गया है, जबकि 300 से अधिक नेत्र पैरामेडिकल कर्मियों को भी तैयार किया गया है, जो देश के विभिन्न अस्पतालों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि समाज के सहयोग और मार्गदर्शन से यह सेवा कार्य निरंतर आगे बढ़ रहा है और भविष्य में अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक इसका लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा
