– कांग्रेस के गठबंधन की तुलना कीचड़ भरे पानी में अंडे सेने के समान

गुवाहाटी, 14 मार्च (हि.स.)। चाय बगानों के बहुराष्ट्रीय मालिकों के साथ समझौता करके कांग्रेस पार्टी ने मजदूरों का शोषण और उत्पीड़न करने के साथ-साथ उन्हें सिर्फ वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया। दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री तरूण गाेगाेई ने अपने 15 साल के कार्यकाल में 10 से अधिक बार चाय बागानों के मालिकों के साथ कोलकाता के पांच सितारा जुड़े होटल आईटीसी सोनार बंगला, होटल पियर्लेस आदि में गुप्त बैठकें करके लेन-देन करने की बातें उस समय समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई थीं।
नियोक्ताओं के साथ गठबंधन के कारण ही कांग्रेस पार्टी ने कभी भी मजदूरों की समस्याओं को हल करने की कोशिश नहीं की। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार ने असम के चाय श्रमिकों को भूमि के पट्टे सौंपकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है, जिसे ‘ग्रीन गोल्ड’ के नाम से जाना जाता है। यह कदम निश्चित रूप से असम की सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था की दिशा को बदल देगा। यह बातें प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रंजीव कुमार शर्मा ने कही।
भाजपा के प्रदेश मुख्यालय अटल बिहारी बाजपेयी भवन में शनिवार काे प्रवक्ता प्रांजल कलिता के साथ संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए रंजीव कुमार शर्मा ने साथ ही कहा कि कांग्रेस का मूल दर्शन है शोषण और उत्पीड़न। इसके विपरीत भाजपा की सोच है समाज के सभी स्तरों के लोगों को उठाकर राष्ट्र निर्माण के काम में संलग्न करना। इसलिए देश के प्रधानमंत्री श्रमिकों के चरणों में सेवा अर्पित कर मिट्टी के पट्टे का शुभारंभ करते हैं और कांग्रेस के शीर्ष नेता अपनी पार्टी के कार्यकर्ता को सेल्फी लेने की अनुमति नहीं देते। कांग्रेस और भाजपा का यही अंतर है।
प्रदेश भाजपा प्रवक्ता रंजीव कुमार शर्मा ने कांग्रेस नेतृत्व में मोर्चा गठन के लिए चल रही गुटबाजी को लेकर कहा कि कांग्रेस के गठबंधन की तुलना कीचड़ भरे पानी में अंडे सेने से की जा सकती है। कांग्रेस दल ने अपने सहयोगी दलों को कभी आवश्यक सम्मान देने का कोई उदाहरण नहीं दिया है। इस दल ने सहयोगियों का केवल राजनीतिक रूप से इस्तेमाल किया और समय आने पर दल से निकाल दिया। अखिल गोगोई इसका उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ऐसे उदाहरण राष्ट्रीय स्तर पर भी देखे जाते हैं। शर्मा का मानना है कि कांग्रेस ने कभी सम्मानजनक स्थिति में मित्रता करने का कोई उदाहरण नहीं दिया है। ——————
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय
