श्रीनगर, 11 मार्च (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर छात्र संघ (जेकेएसए) ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर राजस्थान के मेवाड़ विश्वविद्यालय में नर्सिंग पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर चल रहे विवाद के बीच कश्मीरी छात्रों के कथित उत्पीड़न, निलंबन और एफआईआर दर्ज होने के मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे पत्र में संघ ने कहा कि चित्तौड़गढ़ स्थित मेवाड़ विश्वविद्यालय में बीएससी नर्सिंग कार्यक्रम के पांचवें सेमेस्टर में दाखिला लेने वाले 40 से अधिक कश्मीरी छात्रों को हाल ही में पता चला कि इस पाठ्यक्रम को कथित तौर पर भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) और राजस्थान नर्सिंग परिषद (आरएनसी) से अनिवार्य मान्यता प्राप्त नहीं है। संघ ने कहा कि इस मुद्दे ने छात्रों की डिग्री की वैधता, पेशेवर पंजीकरण प्राप्त करने की उनकी क्षमता और उनके भविष्य के रोजगार की संभावनाओं को लेकर गंभीर अनिश्चितता पैदा कर दी है।
जेकेएसए ने कहा कि यह मामला गंभीर हो गया है क्योंकि छात्रों को अगले चार महीनों के भीतर अपनी डिग्री पूरी करनी है। यदि पाठ्यक्रम को वैधानिक मान्यता प्राप्त नहीं है, तो छात्रों द्वारा प्राप्त डिग्रियों को पेशेवर अभ्यास के लिए मान्यता नहीं दी जा सकती है जिससे उनके शैक्षणिक और व्यावसायिक भविष्य पर संभावित रूप से प्रभाव पड़ सकता है।
एसोसिएशन के अनुसार छात्रों ने विश्वविद्यालय द्वारा पाठ्यक्रम की मान्यता और वैधता के संबंध में दिए गए आश्वासनों पर भरोसा करते हुए सद्भावनापूर्वक इस कार्यक्रम में प्रवेश लिया था। वर्षों से उन्होंने इस कार्यक्रम को पूरा करने में काफी समय, वित्तीय संसाधन और शैक्षणिक प्रयास लगाए हैं। छात्रों ने कथित तौर पर विश्वविद्यालय प्रशासन से संपर्क कर यह स्पष्टीकरण और आधिकारिक दस्तावेज मांगे थे कि बीएससी नर्सिंग पाठ्यक्रम को भारत में नर्सिंग शिक्षा को नियंत्रित करने वाले नियामक निकायों से मान्यता प्राप्त है।
हालांकि एसोसिएशन का आरोप है कि विश्वविद्यालय स्पष्ट और संतोषजनक जवाब देने में विफल रहा। स्पष्टता की कमी के बाद छात्रों ने पाठ्यक्रम की मान्यता स्थिति के संबंध में पारदर्शिता की मांग करते हुए परिसर के अंदर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किया। हालांकि एसोसिएशन का आरोप है कि छात्रों से बातचीत करने के बजाय विश्वविद्यालय प्रशासन ने दंडात्मक कार्रवाई की और विरोध प्रदर्शन में भाग लेने वाले 17 कश्मीरी छात्रों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
एसोसिएशन ने बताया कि छात्रों को बाद में हिरासत में ले लिया गया जिससे परिवारों और जम्मू-कश्मीर से बाहर पढ़ रहे कश्मीरी छात्र समुदाय के सदस्यों में चिंता फैल गई। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ ने यह भी दावा किया कि नर्सिंग कार्यक्रम के लिए कथित तौर पर स्वीकृतियों की कमी के संबंध में इसी तरह की चिंताएं उठाने के बाद विश्वविद्यालय द्वारा पहले ही 33 कश्मीरी छात्रों को निलंबित किया जा चुका है। जम्मू-कश्मीर छात्र संघ के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुएहामी ने कहा कि छात्र शैक्षणिक अनिश्चितता और कानूनी कार्रवाई दोनों से जुड़े दोहरे संकट का सामना कर रहे हैं। छात्र गहरे संकट में हैं क्योंकि उनका शैक्षणिक भविष्य अनिश्चितता में लटका हुआ है। खुहामी ने कहा कि उन्होंने सद्भावना से इस कार्यक्रम में दाखिला लिया था और कथित संस्थागत खामियों या विनियम संबंधी मुद्दों के कारण उन्हें नुकसान नहीं होना चाहिए। एसोसिएशन ने परिसर के माहौल पर भी चिंता जताई और दावा किया कि स्थिति तनावपूर्ण हो गई है और कई छात्रों ने अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका व्यक्त की है।
एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के बाद कुछ कश्मीरी छात्राओं पर हमला किया गया और कुछ छात्रों ने कुछ शिक्षकों द्वारा उत्पीड़न की शिकायत की। एसोसिएशन ने केंद्रीय गृह मंत्री से हस्तक्षेप करने और विश्वविद्यालय में पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा इस मुद्दे को राजस्थान सरकार के समक्ष उठाने का आग्रह किया। पत्र में उठाई गई मांगों में 17 छात्रों के खिलाफ एफआईआर वापस लेना या उसकी समीक्षा करना, कथित उत्पीड़न और हमले की घटनाओं की स्वतंत्र जांच कराना और भारतीय नर्सिंग परिषद और राजस्थान नर्सिंग परिषद से बीएससी नर्सिंग कार्यक्रम की मान्यता की स्थिति का सत्यापन करना शामिल है। एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से यह भी अपील की कि यदि कार्यक्रम में आवश्यक मान्यताएं नहीं पाई जाती हैं तो प्रभावित छात्रों को किसी अन्य मान्यता प्राप्त संस्थान में स्थानांतरित करने या स्थानांतरित करने की सुविधा प्रदान की जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुमन लता
