नई दिल्ली, 07 फ़रवरी (हि.स.)। देश की राजधानी दिल्ली में अगर कोई आम नागरिक सुरक्षित नहीं है, तो उसकी वजह अपराधी नहीं बल्कि वही सिस्टम है, जो सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने का दावा करता है। यह कहना है जनकपुरी हादसे में खो चुके बेटे कमल के परिजनों का। कैलाशपुरी इलाके में 25 वर्षीय कमल ध्यानी की मौत इसी सिस्टम की नाकामी का ताजा उदाहरण है। एक ऐसी मौत, जिसे प्रशासन “हादसा” कहकर फाइलों में दफन करना चाहता है।

कमल के भाई करण ने बताया कि वह कैलाशपुरी गली नंबर- 11 में किराए के मकान में रहते है। यही वह अपने दाे भाई मयंक व कमल के सािा रहते थे, जबकि माता पिता दूसरी जगह रहते थे। परिवार में पिता नरेश चंद्र ध्यानी और मां शांति देवी है। वह मूलत: उत्तराखंड के रहने वाले है। पिता नरेश ध्यानी पूजा-पाठ करते है। करण के अनुसार उनका भाई कमल ध्यानी बैंक में नौकरी करता था। वही घर का किराया देता था, वही राशन लाता था, वही माता-पिता की दवाइयों का इंतजाम करता था। वह बेरोजगार थे। करण का आरोप है कि कमल की मौत किसी बीमारी या दुर्घटना से नहीं बल्कि प्रशासनिक की लापरवाही से हुई। जिस सड़क पर कमल की जान गई, वहां लंबे समय से गड्ढा खुला पड़ा था। न कोई बैरिकेड, न कोई चेतावनी बोर्ड, न स्ट्रीट लाइट की समुचित व्यवस्था। यह हालात किसी दूरदराज गांव के नहीं बल्कि देश की राजधानी के हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस गड्ढे को लेकर कई बार शिकायत की गई थी। लेकिन न नगर निगम ने सुना, न संबंधित विभाग ने सुध ली।
जब हादसा हुआ, तब जाकर प्रशासन हरकत में आया और वह भी सिर्फ लीपापोती के लिए। परिवार का आरोप है कि घटना के कुछ घंटों बाद ही गड्ढे के आसपास बेरिकेड लगाया गया। ताकि सबूत मिट जाएं और सवाल न उठें। कमल के दोस्त सौरव ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि यह हादसा नहीं, सिस्टम की हत्या है। अगर गड्ढा ढका होता, बैरिकेड लगे होते, तो आज कमल जिंदा होता।
अब तक पुलिस ने यह कियादिल्ली जनकपुरी हादसा मामले में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए गड्ढे में एक बाइक सवार के गिरने की जानकारी अधिकारियों को न देने के आरोप में एक सब-कॉन्ट्रैक्टर को गिरफ्तार किया है। दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने शनिवार को इसकी जानकारी दी। पुलिस उपायुक्त दराडे शरद भास्कर ने बताया कि जांच के अनुसार, राजेश कुमार प्रजापति (47) को पुलिस को मामले की जानकारी मिलने से घंटों पहले ही पता चल गया था कि कोई गड्ढे में गिर गया है।
एक चश्मदीद के बयान के आधार पर पुलिस ने बताया कि चश्मदीद, विपिन सिंह, जो शादी में शामिल होने के बाद सागरपुर स्थित अपने घर लौट रहा था। उसने देखा कि एक मोटरसाइकिल गड्ढे में गिरी हुई है और उसने पास के एक गैरेज के सुरक्षा गार्ड को इसकी सूचना दी। अधिकारी ने बताया, इसके बाद गार्ड ने योगेश नाम के एक मजदूर को अलर्ट किया, जिसने गड्ढे में देखा और पाया कि मोटरसाइकिल की हेडलाइट जल रही थी और अंदर एक इंसान दिख रहा था। पुलिस ने बताया कि कॉल डिटेल रिकॉर्ड से पता चला कि योगेश ने रात करीब 12:22 बजे प्रजापति को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद सब-कॉन्ट्रैक्टर 15-से 20 मिनट के अंदर मौके पर पहुंच गया। हालांकि, प्रजापति ने उस समय ना तो पुलिस को और ना ही किसी इमरजेंसी अथॉरिटी को सूचना दी। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को अगले दिन सुबह करीब 8 बजे मिली।
पुलिस के अनुसार बी. कॉम ग्रेजुएट और त्रि नगर में रहने वाले प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया है और योगेश का पता लगाने के लिए टीमें भेजी गई हैं। पुलिस का कहना है कि घटना के सही क्रम का पता लगाने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।
पुलिस अधिकारी के अनुसार मोबाइल फोन लोकेशन डिटेल्स के आधार पर, परिवार और पुलिस कर्मियों ने बाद में जनकपुरी इलाके में कई घंटों तक खोजबीन की, जिसके बाद घटनास्थल का पता चला। जनकपुरी थाने में ठेकेदार और संबंधित दिल्ली जल बोर्ड अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारी का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / कुमार अश्वनी
