जबलपुर, 08 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेश के बाद एसडीएम अधारताल की मौजूदगी में जबलपुर शहर में रहने वाले गयासुद्दीन कुरैशी की लाश एक साल बाद बुधवार को कब्र से बाहर निकाली गई। लाश को निकालने के बाद पोस्टमार्टम के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां उसी दिन लाश का परीक्षण कराया गया।

पूरी कार्यवाही की पुलिस ने वीडियोग्राफी कराई। नरसिंहपुर जिले के स्टेशनगंज थाना पुलिस की टीम भी मौके पर मौजूद रही। शव की पहचान सीने में रखे काबा के कपड़े से परिजनों ने की।
दरअसल, मंगलवार को हुई सुनवाई में जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस एके सिंह की डिवीजन बेंच ने सख्त आदेश देते हुए कहा था कि बुधवार दोपहर 1 बजे तक शव कब्र से निकालकर उसी दिन पोस्टमार्टम कराया जाए। मामले में मृतक के भाई कसीमुद्दीन कुरैशी ने गयासुद्दीन की मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी और जांच के लिए जनवरी 2026 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
बिना जांच के दफना दिया गया थागयासुद्दीन कुरैशी 26 मार्च 2025 को सड़क हादसे में घायल हो गए थे। इलाज के लिए उन्हें पहले जबलपुर, फिर नागपुर ले जाया गया। 27 मार्च को नागपुर में उनकी मौत हो गई। शव को बिना विस्तृत जांच के दफना दिया गया था। मृतक के भाई का आरोप था कि डिस्चार्ज रिपोर्ट में उसके सीने पर चोट के निशान पाए गए थे, जिससे कि उसकी मौत संदिग्ध परिस्थितियों में होना माना जा रहा है।
उनका कहना है कि जबलपुर पुलिस को शिकायत देने के बावजूद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। नरसिंहपुर जिले के बहोरीपार गांव में उनका पैतृक निवास है। यहीं दुर्घटना हुई थी।
पुलिस अधीक्षक से की थी जांच की मांगकसीमुद्दीन कुरैशी ने गयासुद्दीन की मौत को संदिग्ध बताते हुए पुलिस अधीक्षक से जांच की मांग की थी, जब पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की तो कसीमुद्दीन ने मप्र उच्च न्यायालय की शरण ली। बताया जा रहा है कि सड़क दुर्घटना में मौत के बाद पुलिस ने गयासुद्दीन का पोस्टमार्टम नहीं कराया था और परिवार की सहमति से शव दफन कर दिया था। बाद में गयासुद्दीन ने इस पर सवाल उठाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / विलोक पाठक
