जयपुर, 12 मार्च (हि.स.)। उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में सिग्नल विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की गई है। सिग्नल मेंटेनेंस एंड मैनेजमेंट सिस्टम (SMMS) के तहत सिग्नल कर्मचारियों को हैंड-हेल्ड टैबलेट उपकरण वितरित किए गए। इसका उद्देश्य सिग्नलिंग परिसंपत्तियों के रख-रखाव, निरीक्षण और प्रबंधन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाना है।

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पूजा मित्तल ने बताया कि मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने सिग्नल कर्मचारियों को टैबलेट वितरित किए। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) अशफाक हुसैन अंसारी, वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर ललित कुमार सहित मंडल के अन्य अधिकारी और पर्यवेक्षक उपस्थित रहे।
मंडल रेल प्रबंधक रवि जैन ने कहा कि भारतीय रेल लगातार आधुनिक तकनीकों को अपनाकर अपनी सेवाओं को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और कुशल बनाने की दिशा में काम कर रही है। सिग्नलिंग प्रणाली ट्रेनों की सुरक्षित और समयबद्ध आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसके रख-रखाव और नियमित निगरानी का कार्य भी बेहद जिम्मेदारीपूर्ण होता है। डिजिटल प्रणाली से इस कार्य को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाया जा सकेगा।
एसएमएमएस के माध्यम से सिग्नलिंग उपकरणों के रख-रखाव से संबंधित सभी गतिविधियों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे फील्ड में कार्यरत सिग्नल कर्मचारियों को निरीक्षण, परीक्षण और मरम्मत से जुड़ी जानकारी तुरंत दर्ज करने की सुविधा मिलेगी, वहीं अधिकारी स्तर पर भी इन सूचनाओं की निगरानी और विश्लेषण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।
पहले जहां मेंटेनेंस से जुड़ी जानकारी कागजी रजिस्टरों में दर्ज की जाती थी, वहीं अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल माध्यम से संपन्न होगी। टैबलेट Wi-Fi और 5G कनेक्टिविटी से लैस हैं, जिससे फील्ड में कार्यरत कर्मचारी नेटवर्क उपलब्ध होने पर सिग्नलिंग परिसंपत्तियों से संबंधित डेटा रियल-टाइम में अपडेट कर सकेंगे। इससे किसी भी तकनीकी समस्या या रख-रखाव गतिविधि की जानकारी तुरंत संबंधित अधिकारियों तक पहुंच सकेगी।
वरिष्ठ मंडल सिग्नल एवं दूरसंचार इंजीनियर ललित कुमार ने बताया कि इस प्रणाली से सिग्नलिंग उपकरणों के निरीक्षण और रख-रखाव की प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और तकनीक आधारित बनेगी। डिजिटल ट्रैकिंग से अधिकारियों को विभिन्न परिसंपत्तियों की स्थिति की जानकारी आसानी से प्राप्त होगी और भविष्य में मेंटेनेंस योजना बनाने तथा संभावित तकनीकी समस्याओं का पूर्वानुमान लगाने में भी सहायता मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजेश
