
स्थानीय प्रशासन से लेकर प्रदेश स्तर तक के अधिकारियों की अनुमति के बाबजूद नहीं खुला गेट का ताला

झांसी, 06 अप्रैल (हि.स.)। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा स्थापना को लेकर सोमवार को शहर में विवाद की स्थिति बन गई। कर्मयोगी संस्था के पदाधिकारी सुबह से शाम तक रानी लक्ष्मीबाई पार्क में प्रतिमा स्थापना के लिए डटे रहे, लेकिन पार्क का गेट नहीं खोला गया, जिससे प्रतिमा लोडिंग वाहन में ही खड़ी रही। इस वाक्य को लेकर यह कहना गलत न होगा कि वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई को अपनी ही भूमि पर बने अपने पार्क में अंदर जाने के लिए 9 घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
संस्था का आरोप है कि सभी आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियां लेने के बावजूद प्रतिमा स्थापना में बाधा डाली गई। संस्था अध्यक्ष संतोष कुमार गौड़ के अनुसार शासन से अनुमति मिलने के बाद जिलाधिकारी, एसएसपी, नगर आयुक्त सहित संबंधित विभागों को सूचित किया गया था। इसके बावजूद मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासन के अधिकारी कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सके कि पार्क का द्वार क्यों नहीं खोला गया। वहीं स्थानीय पार्षद समेत कुछ पार्षदों के नाम भी चर्चा में आ रहे हैं।
संस्था पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि एक पार्षद की अनुचित मांग पूरी न होने के कारण यह अवरोध उत्पन्न किया गया। उन्होंने इसे ऐतिहासिक गद्दारी से जोड़ते हुए कहा कि जैसे 1857 में दूल्हा जू जैसे लोगों ने विश्वासघात किया था, उसी मानसिकता के कारण आज भी वीरांगना का सम्मान बाधित हो रहा है।
गौरतलब है कि 1857 की क्रांति के दौरान दूल्हा जू, जो रानी का विश्वासपात्र सैनिक था, ने अंग्रेजों से मिलकर किले का द्वार खोल दिया था, जिससे अंग्रेज झांसी किले में प्रवेश कर सके थे।
संस्था का कहना है कि सिंहासन पर विराजमान रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा विश्व में कहीं स्थापित नहीं है और इसके स्थापित होने से पार्क की सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व बढ़ेगा।
इस मामले में शाम करीब सात बजे महापौर बिहारी लाल आर्य, अपर जिला मजिस्ट्रेट वरुण पांडेय और नगर मजिस्ट्रेट प्रमोद झा,अपर नगर आयुक्त राहुल यादव मौके पर पहुंचे, जिसके बाद प्रतिमा को पार्क के अंदर रखवाया गया। हालांकि, प्रपत्रों में दिए गए स्थान को बदलते हुए प्रतिमा को दूसरे स्थान पर उतरवाया गया है।
इस संबंध में महापौर बिहारी लाल आर्य ने बताया कि जैसे ही उन्हें मामले की जानकारी हुई उन्होंने तुरंत वहां पहुंचकर महारानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा को अंदर रखवाया। हालांकि यह बताने से सभी कतराते नजर आए कि आखिर विवाद क्या था और क्यों 9 घंटे लगे।
शासन कौन होता है ?
दोपहर के समय जब दरवाजा खुलवाने को लेकर गहमा गहमी चल रही थी उसी समय पार्क की सुरक्षा में लगी तथाकथित सिक्योरिटी का अपने आप को मालिक बताने वाला वहां कोई पहुंचा। उसने बहस के दौरान कर्मयोगी संस्था के लोगों से यह तक कह दिया कि आखिर शासन कौन होता है ?
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हिन्दुस्थान समाचार / महेश पटैरिया
