पश्चिम मेदिनीपुर, 12 अप्रैल (हि.स.)। डेबरा विधानसभा क्षेत्र में इस बार का चुनावी मुकाबला कड़ा माना जा रहा है। तृणमूल कांग्रेस ने यहां उम्मीदवार बदलते हुए राजीव बनर्जी को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने स्थानीय नेता सुभाशीष ओम को प्रत्याशी बनाया है। ऐसे में जीत के लिए तृणमूल के सामने सबसे बड़ी चुनौती है -गुटबाजी को खत्म कर संगठन को एकजुट करना है।

डेबरा प्रखंड तृणमूल अध्यक्ष प्रदीप कर ने इस दिशा में पहल करते हुए विभिन्न गुटों के नेताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। उनके प्रयास से पूर्व विधायक राधाकांत मायती, सलीमा खातून, जिला परिषद की कार्याध्यक्ष शांति टुडू और पंचायत समिति के कार्याध्यक्ष सीतेस धारा सहित कई नेता एकजुट होकर चुनाव प्रचार में जुट गए हैं।
डेबरा में प्रखंड या जिला स्तर के किसी स्थानीय नेता को भी उम्मीदवार नहीं बनाया गया। इसके बजाय राजीव बनर्जी को प्रत्याशी बनाए जाने के कारण विरोधियों ने शुरू से ही उन्हें “बाहरी” कहकर प्रचारित करना शुरू कर दिया था। इसके अलावा डेबरा में तृणमूल के भीतर गुटीय संघर्ष जिले में सबसे अधिक माना जाता है। यहां केवल दो गुट नहीं बल्कि छोटे-बड़े कई नेता अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग खेमे बनाकर राजनीति करते रहे हैं। इन सभी को एक मंच पर एक साथ शायद ही कभी देखा गया था।
प्रदीप कर का कहना है कि पार्टी को जीत दिलाना ही सबसे बड़ा लक्ष्य है, इसलिए सभी गुटों को साथ लेकर चुनाव लड़ा जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि एकजुट प्रयास से राजीव बनर्जी को जीत दिलाकर डेबरा की सीट मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सौंप दी जाएगी।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने स्थानीय निवासी सुभाशीष ओम को उम्मीदवार बनाया है। इसी प्रखंड में घाटाल संगठनात्मक जिले के भाजपा अध्यक्ष तन्मय दास का भी घर है और क्षेत्र में उनका अपना प्रभाव माना जाता है।
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल के उम्मीदवार हुमायूं कबीर ने भाजपा की भारती घोष को 11 हजार 226 मतों से हराया था। हालांकि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में तृणमूल उस बढ़त को बनाए नहीं रख सकी। डेबरा-एक, डेबरा-दो , लोयादा, खानामोहन, राधामोहनपुर-दो और भवानीपुर-एक ग्राम पंचायत क्षेत्रों में तृणमूल को हार का सामना करना पड़ा, जिसके कारण भाजपा इस विधानसभा क्षेत्र में चार हजार 019 मतों से आगे रही।—————
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
