कोलकाता, 17 मार्च (हि. स.)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने बड़े स्तर पर उम्मीदवारों में बदलाव करते हुए 74 मौजूदा विधायकों के टिकट काट दिए हैं। पार्टी ने 294 में से 291 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इसे सत्ता विरोधी माहौल को संतुलित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है क्योंकि पार्टी लगातार चौथी बार सरकार बनाने की कोशिश में है।

मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कोलकाता स्थित अपने कालीघाट आवास से उम्मीदवारों की घोषणा करते हुए कहा कि पार्टी 291 सीटों पर चुनाव लड़ेगी और 226 से अधिक सीटें जीतेगी। दार्जिलिंग पहाड़ी क्षेत्र की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा के लिए छोड़ी गई हैं।
इस सूची के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ सीधा मुकाबला और तेज हो गया है। भवानीपुर सीट पर एक बार फिर ममता बनर्जी का मुकाबला विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी से होने जा रहा है। वर्ष 2021 के नंदीग्राम चुनाव की तरह यह मुकाबला भी काफी चर्चित माना जा रहा है।
पार्टी ने 224 विधायकों में से 135 को दोबारा उम्मीदवार बनाया है, जबकि 15 को दूसरी सीटों पर भेजा गया है और 74 के टिकट काटे गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी नाराजगी को कम करने और संगठन को मजबूत बनाए रखने की संतुलित रणनीति है।
वर्ष 2021 के चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने 294 में से 215 सीटें जीती थीं, जो बाद में दल बदल और उपचुनावों के बाद बढ़कर 225 हो गई थीं।
इस बार पार्टी ने अनुभवी नेताओं के साथ कुछ नए और पेशेवर चेहरों को भी मौका दिया है। ओलंपियन और एशियाई खेल स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिवशंकर पाल को तुफानगंज से टिकट मिला है। अभिनेता-राजनेता सोहम चक्रवर्ती को तेहट्ट सीट से मैदान में उतारा गया है और पार्टी प्रवक्ता कुनाल घोष बेलियाघाटा से पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
उम्मीदवारों की सूची से बाहर किए गए प्रमुख नेताओं में बारासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहाला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी शामिल हैं।
पार्टी ने कुछ युवा चेहरों को भी मौका दिया है, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से सांसद कल्याण बनर्जी के पुत्र सिरसन बनर्जी शामिल हैं।
उम्मीदवारों के सामाजिक समीकरण पर नजर डालें तो 291 उम्मीदवारों में 239 पुरुष (82 प्रतिशत) और 52 महिलाएं (18 प्रतिशत) हैं। इनमें 149 सामान्य और अन्य पिछड़ा वर्ग (51 प्रतिशत), 78 अनुसूचित जाति (27 प्रतिशत), 17 अनुसूचित जनजाति (छह प्रतिशत) और 47 अल्पसंख्यक (16 प्रतिशत) उम्मीदवार शामिल हैं।
इसके अलावा 11 अनुसूचित जाति और जनजाति उम्मीदवारों को गैर आरक्षित सीटों पर भी उतारा गया है, जिसे सामाजिक आधार बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
आयु वर्ग के हिसाब से भी पार्टी ने संतुलन रखा है। चार उम्मीदवार 31 वर्ष से कम आयु के हैं, जबकि 38 उम्मीदवार 31 से 40 वर्ष आयु वर्ग के हैं। सबसे अधिक 51 से 60 वर्ष आयु वर्ग के 89 उम्मीदवार हैं, जबकि 41 से 50 वर्ष आयु वर्ग के 88 उम्मीदवारों को टिकट मिला है।
पार्टी नेताओं के अनुसार उम्मीदवार चयन में जमीनी पकड़ और संगठनात्मक क्षमता को प्राथमिकता दी गई है ताकि बूथ स्तर पर चुनावी प्रबंधन मजबूत रखा जा सके।
नंदीग्राम सीट से तृणमूल ने हाल ही में पार्टी में लौटे पवित्र कर को उम्मीदवार बनाया है। इसके अलावा बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों में मजबूत जिला स्तरीय नेताओं को बरकरार रखा गया है।
294 सदस्यीय विधानसभा के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना बाद में की जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर
