दमोह, 21 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को समय पर और सुगमता से उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विकसित की गई ‘ई-विकास प्रणाली’ दमोह जिले में एक मार्च से लागू की जा रही है। इस संबंध में कलेक्टर कार्यालय में शनिवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में कृषि विभाग के अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत किसान अब घर बैठे अपने मोबाइल फोन से ई-टोकन बुक कर सकेंगे। इसके माध्यम से वे डबल लॉक केंद्रों, एमपी एग्रो, निजी उर्वरक विक्रेताओं तथा प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों से अपनी सुविधा अनुसार खाद प्राप्त कर पाएंगे। इससे किसानों को लंबी कतारों में खड़े होने की आवश्यकता नहीं होगी और वितरण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।

जिले की सभी प्राथमिक सहकारी समितियों, निजी उर्वरक विक्रेताओं के प्रतिष्ठानों, डबल लॉक केंद्रों, ग्राम पंचायतों और आंगनबाड़ी केंद्रों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं। किसान इन क्यूआर कोड को स्कैन कर स्वयं या विभागीय अधिकारियों/कर्मचारियों की सहायता से नि:शुल्क टोकन बुक कर सकेंगे। जिन किसानों के पास स्मार्टफोन नहीं है, वे संबंधित केंद्रों पर जाकर भी टोकन बुक करा सकते हैं।
इसी दौरान कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने बताया कि यह प्रणाली किसानों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि उर्वरक वितरण अब वैज्ञानिक अनुशंसाओं के आधार पर किया जाएगा और किसानों को खाद भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की सिफारिशों के अनुसार उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और भूमि की उर्वरता बनी रहेगी।
कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को आधार कार्ड के माध्यम से पंजीयन कर अपनी एग्री स्टेट आईडी बनवाना अनिवार्य होगा। एग्री स्टेट आईडी से भूमि की जानकारी लिंक कर किसान अपनी पसंद के विक्रेता का चयन कर सकेंगे। भविष्य में कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं का लाभ भी इसी आईडी के माध्यम से दिए जाने की योजना है।
ज्ञात हो कि जिले में दिसंबर माह से सीमित रूप से ई-टोकन प्रणाली लागू थी, जिसके अंतर्गत केवल डबल लॉक केंद्रों और एमपी एग्रो से खाद वितरण किया जा रहा था। अब ई-विकास प्रणाली के माध्यम से इसका दायरा बढ़ाकर निजी विक्रेताओं और सहकारी समितियों को भी शामिल किया गया है।
प्रशासन द्वारा आगे चलकर उर्वरक की होम डिलीवरी सुविधा शुरू करने की भी तैयारी की जा रही है, जिससे किसानों को और अधिक सुविधा मिल सकेगी। नई व्यवस्था से उम्मीद है कि खाद वितरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता सुनिश्चित होगी तथा किसानों को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव
