जम्मू, 30 मार्च (हि.स.)। परम पूज्य ब्रह्मनिष्ठ, तपोनिष्ठ स्वामी व्यासानंद जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित दो दिवसीय संतमत सत्संग का समापन सोमवार को श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ हुआ। महर्षि मेंही ब्रह्म विद्यापीठ से पधारे स्वामी जी के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को गहन आत्मचिंतन और नई प्रेरणा से भर दिया। सत्संग की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने भाग लिया। पूरे वातावरण में भजन-कीर्तन और धार्मिक नारों की गूंज से श्रद्धा और एकता का भाव देखने को मिला।

दो दिनों तक चले इस आयोजन में दूर-दूर से आए श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के उपदेशों को ध्यानपूर्वक सुना और आध्यात्मिक वातावरण में लीन रहे। अपने प्रवचनों में स्वामी जी ने मानव जीवन को ईश्वर भक्ति के लिए समर्पित करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य स्वस्थ है और देखने-सुनने की क्षमता रखता है, तब तक उसे हर सांस में परमात्मा का स्मरण करना चाहिए।
उन्होंने यह भी बताया कि भौतिक वस्तुएं क्षणभंगुर हैं जबकि सत्संग का मार्ग व्यक्ति को स्थायी शांति और ईश्वर के निकट ले जाता है। सरल उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मार्ग अपनाने में देर न करने की प्रेरणा दी। वर्तमान समय की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए स्वामी जी ने भौतिकवाद, तनाव और प्रतिस्पर्धा के बीच नैतिक मूल्यों पर टिके रहने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं से नशे और गलत आदतों से दूर रहकर अनुशासित जीवन जीने का आह्वान किया।
सत्संग के समापन पर सामूहिक प्रार्थना की गई और श्रद्धालुओं ने भक्ति, आत्मअनुशासन और आध्यात्मिक जीवन को अपनाने का संकल्प लिया। यह आयोजन न केवल धार्मिक भावना को मजबूत करने वाला रहा बल्कि समाज में एकता, सद्भाव और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने का माध्यम भी बना।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा
