नरसिंहपुर, 14 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने म्यूल अकाउंट गिरोह का भंडाफोड़ किया है। जिले में पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ लोग आम नागरिकों को लालच देकर उनके बैंक खाते, पासबुक और एटीएम कार्ड का इस्तेमाल अवैध लेन-देन के लिए कर रहे हैं। इन खातों का उपयोग ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म, साइबर फ्रॉड और सेक्सटॉर्शन जैसे अपराधों से प्राप्त धन को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जा रहा था।

मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीना ने विशेष जांच टीम का गठन किया। टीम को तकनीकी माध्यमों से संदिग्ध बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और ऑनलाइन लेन-देन की जानकारी जुटाकर विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए गए थे। जांच के दौरान पुलिस ने विभिन्न बैंकों से खातों का विवरण प्राप्त कर उनके लेन-देन का गहन विश्लेषण किया।
जांच में सामने आया कि जिले में लगभग 180 बैंक खातों का उपयोग म्यूल अकाउंट के रूप में किया जा रहा था। इन खातों के माध्यम से साइबर अपराधियों द्वारा बड़ी मात्रा में अवैध लेन-देन किया जा रहा था। पुलिस द्वारा इन खातों के संचालन को रोकने के लिए संबंधित बैंकों को पत्राचार कर कार्रवाई शुरू की गई।
इस संबंध में शनिवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस की जांच में अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन का खुलासा हुआ है। यह राशि साइबर ठगी के जरिए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर छिपाई जा रही थी। आरोपी आम लोगों को छोटे-मोटे आर्थिक लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते हासिल करते थे और उन्हीं खातों के जरिए ठगी की रकम को विभिन्न प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर करते थे।
नरसिंहपुर पुलिस ने अब तक विशेष कार्रवाई करते हुए 35 म्यूल अकाउंट बंद कराए हैं। साथ ही इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजा गया है। गिरफ्तार आरोपियों में करेली, ठेमी, गाडरवाड़ा और अन्य क्षेत्रों के कई व्यक्ति शामिल हैं। इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) और 3(5) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 9 पासबुक, 4 एटीएम कार्ड और 9 मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। इसके अलावा कई संदिग्ध व्यक्तियों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई भी की गई है।
उल्लेखनीय है कि साइबर अपराधों के खिलाफ पुलिस की सक्रियता का परिणाम यह भी रहा कि पिछले एक वर्ष में साइबर फ्रॉड से जुड़े मामलों में लगभग 45 लाख रुपये की राशि पर होल्ड लगवाया गया। वहीं लगातार प्रयासों के चलते करीब 53 लाख रुपये पीड़ित खाताधारकों को वापस दिलाए गए। वहीं, इस पूरे प्रकरण के खुलासे में करेली थाना प्रभारी निरीक्षक रत्नाकर हिग्वें, स्टेशनगंज के निरीक्षक सौरभ पटेल, गाडरवाड़ा के निरीक्षक अशोक चौहान सहित पुलिस टीम के कई अधिकारियों और कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / भागीरथ तिवारी
