
जयपुर, 28 जनवरी (हि.स.)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जयपुर स्थित बिड़ला सभागार में मंगलवार को पंचायती राज सशक्तीकरण सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा, प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार, कांग्रेस के जिलाध्यक्ष, वरिष्ठ नेता एवं सिविल सोसायटी के सामाजिक कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भाजपा की प्रदेश सरकार पर संविधान के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव छह वर्ष से अधिक समय से लंबित हैं, जबकि संविधान के अनुच्छेद 243-ई और 243-यू में स्पष्ट रूप से पांच वर्ष में चुनाव कराना अनिवार्य है। इसके बावजूद भाजपा सरकार ने जानबूझकर चुनाव नहीं कराए, जिससे ग्रामीण राजस्थान का विकास पूरी तरह ठप हो गया है।

डोटासरा ने कहा कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हुए एक वर्ष से अधिक समय हो चुका है, सरपंचों को प्रशासक बना दिया गया है, प्रधान और जिला परिषद सदस्य कार्यमुक्त हो चुके हैं और पिछले दो वर्षों से पंचायती राज संस्थाओं को विकास के लिए कोई राशि नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जनप्रतिनिधियों को निलंबित कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रही है।
उन्होंने कहा कि भाजपा के नेता और प्रधानमंत्री संसद में संविधान की दुहाई देते हैं, लेकिन प्रदेश में उनकी ही सरकार संविधान का खुलेआम उल्लंघन कर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी द्वारा लाए गए 73वें और 74वें संविधान संशोधन से गरीब, पिछड़े, दलित, युवा और अल्पसंख्यकों को नेतृत्व का अवसर मिला, लेकिन भाजपा इस व्यवस्था को समाप्त करने पर तुली हुई है।
डोटासरा ने ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा और कहा कि उच्चतम न्यायालय के 2021 के आदेश के बावजूद भाजपा सरकार ने दो वर्षों तक ओबीसी आयोग का गठन नहीं किया और अब आयोग को संसाधन नहीं दिए जा रहे हैं, जिससे चुनाव और अधिक टलते जा रहे हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पंचायती राज चुनाव के लिए भी केंद्र से पर्ची का इंतजार कर रही है, जिसके कारण राजस्थान को 3000 करोड़ रुपये का नुकसान होने की स्थिति बन गई है। वन स्टेट-वन इलेक्शन के नाम पर ग्रामीण विकास के लिए मिलने वाला कोष भी गंवाया गया है।
मनरेगा पर बोलते हुए डोटासरा ने कहा कि यूपीए सरकार के समय शुरू की गई यह योजना ग्रामीण भारत की जीवनरेखा थी, लेकिन भाजपा सरकार ने इसे समाप्त कर गरीबों के अधिकार छीन लिए हैं। केंद्र सरकार पर राजस्थान का 5000 करोड़ रुपये मनरेगा बकाया है और दो वर्षों से काम रुके हुए हैं।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए राजस्थान प्रभारी सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि पार्टी में राहुल गांधी के नेतृत्व में बड़े बदलाव हुए हैं और अब टिकट योग्यता के आधार पर दिए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पंचायती राज कांग्रेस की देन है और भाजपा इसे खत्म करना चाहती है। अब कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर भाजपा के कुशासन के खिलाफ नई लड़ाई लड़नी होगी।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि वे स्वयं पंचायती राज संस्थाओं से निकलकर यहां तक पहुंचे हैं। उन्होंने मनरेगा को पंचायती राज की सबसे मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि भाजपा ने इस कानून को खत्म कर गरीबों पर सबसे बड़ा हमला किया है। कांग्रेस शासन में मनरेगा के लिए 7000 करोड़ रुपये का बजट था, जिसे भाजपा सरकार ने कम कर अंततः योजना को ही समाप्त कर दिया।
सम्मेलन को पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सी. पी. जोशी, राजीव गांधी पंचायती राज संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील पंवार, प्रदेश प्रभारी रीना वाल्मीकि, प्रदेशाध्यक्ष सी. बी. यादव, प्रधान संघ अध्यक्ष दिनेश सूण्डा ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में एमकेएसएस सिविल सोसायटी के सामाजिक कार्यकर्ताओं शंकर लाल, मुकेश कुमार और कमल टांक ने मनरेगा बचाओ संग्राम को लेकर महत्वपूर्ण तथ्य रखते हुए अपने विचार साझा किए। अंत में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने संकल्प किया कि पंचायती राज संस्थाओं के आगामी चुनावों में एकजुट होकर पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को विजयी बनाएंगे और 2028 में प्रदेश में कांग्रेस की सरकार पुनः स्थापित करेंगे।
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हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
