पूर्वी सिंहभूम, 08 जनवरी (हि.स.)। मिथिला और मैथिली भाषी समाज ने मैथिली भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा देने का मांग पत्र मिथिला सांस्कृतिक परिषद ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा है। मांग पत्रमें मैथिली की प्राचीनता, समृद्ध साहित्यिक परंपरा और सांस्कृतिक योगदान को रेखांकित करते हुए इसे शास्त्रीय भाषा घोषित करने का आग्रह किया गया है।

भारत की प्राचीन भाषाओं में से एक मैथिली को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किए जाने पर मिथिला और मैथिली भाषी समाज ने केंद्र सरकार और राष्ट्रपति के प्रति आभार व्यक्त किया है। इस संबंध में मिथिला सांस्कृतिक परिषद की ओर से एक विस्तृत आभार वक्तव्य जारी किया गया। परिषद ने कहा कि सिंहभूम क्षेत्र में लगभग तीन लाख और झारखंड में करीब 16 लाख मैथिली भाषी निवास करते हैं, जिनके लिए यह निर्णय ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है।

परिषद ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार की ओर से अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और जगत जननी माता जानकी के प्राकट्य स्थल पुनौरा धाम में भव्य मंदिर के शिलान्यास से मिथिला की संस्कृति, भाषा और सनातन परंपरा को नया सम्मान मिला है। इसे मिथिला की सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण के रूप में देखा जा रहा है।
इस मांग पत्र पर मिथिला सांस्कृतिक परिषद के ट्रस्टी इंद्रनाथ मिश्रा, विमलेंद्र झा और एसएन ठाकुर का नाम उल्लेखित है। परिषद के अध्यक्ष मोहन ठाकुर, महासचिव धर्मेश झा (लड्डू) और कोषाध्यक्ष रंजीत झा ने भी इस मांग का समर्थन करते हुए कहा कि मैथिली को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलना मिथिला की पहचान और सम्मान को और मजबूत करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
