छिंदवाड़ा, 01 मार्च (हि.स.)। मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में इस वर्ष होली का पर्व पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सौहार्द के संदेश के साथ मनाने का निर्णय लिया गया है। जिला प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे इस पावन पर्व को परंपरागत उल्लास के साथ-साथ प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए मनाएं।

जिले के कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने नागरिकों से आग्रह किया है कि वे आपसी भाईचारे, सामाजिक एकता और सद्भावना के साथ होली का त्योहार मनाएं। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और प्रेम का प्रतीक भी है। ऐसे में सभी नागरिक अपने मतभेदों और विवादों को भुलाकर हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाएं।

कलेक्टर ने पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लोगों से विशेष अपील की है कि होलिका दहन के दौरान लकड़ी का अत्यधिक उपयोग न करें। इसके स्थान पर गौ काष्ठ या कंडे का उपयोग किया जाए, जिससे पेड़ों की कटाई कम होगी और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचेगा। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे प्रयासों से हम प्रकृति की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।
इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से जल संरक्षण का भी ध्यान रखने की अपील की है। कलेक्टर ने कहा कि होली के दौरान पानी की अनावश्यक बर्बादी से बचना चाहिए और सूखे या सीमित पानी के साथ त्योहार मनाने का प्रयास करना चाहिए। साथ ही लोगों से प्राकृतिक और हर्बल रंगों का उपयोग करने की भी अपील की गई है, ताकि त्वचा और पर्यावरण दोनों सुरक्षित रह सकें।
कलेक्टर हरेंद्र नारायण ने यह भी कहा कि होली खेलते समय पशु-पक्षियों का विशेष ध्यान रखा जाए और उन पर रंग न डाला जाए। रासायनिक रंगों से उन्हें नुकसान हो सकता है, इसलिए सभी नागरिक संवेदनशीलता के साथ इस त्योहार को मनाएं।
जिला प्रशासन का मानना है कि यदि सभी नागरिक पर्यावरण के प्रति सजग रहते हुए त्योहार मनाएं, तो यह न केवल प्रकृति की रक्षा करेगा बल्कि समाज में सकारात्मक संदेश भी देगा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे इस होली को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / sandeep chowhan
