बाराबंकी, 08 फ़रवरी (हि.स.)। प्रदेश की राजधानी को नेपाल राष्ट्र से जोड़ने वाले बाराबंकी व बहराइच सीमा पर स्थित सरयू घाघरा नदी का एकमात्र पुल संजय सेतु जर्जर हो चुका है। उसे बनाने के लिए एन एच आई की टीम घाघरा पुल के नीचे डेरा डाले हुए है। अब सिर्फ सरकार की अनुमति का इंतजार है। लखनऊ को देवीपाटन मंडल (बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलरामपुर से जोड़ने वाले घाघरा नदी के संजय सेतु की मरम्मत का कार्य अब आमजन की सुविधा को ध्यान में रखकर शुरू होगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप के बाद यह निर्णय लिया गया है कि जब तक नदी पर वैकल्पिक पांटून पुल (पीपा पुल) तैयार नहीं हो जाता, तब तक संजय सेतु पर यातायात बंद नहीं किया जाएगा। एनएचएआई द्वारा पुल मरम्मत के लिए 60 दिनों तक पूरी तरह बंद करने की योजना थी। इससे क्षेत्र की बड़ी आबादी को होने वाली असुविधा को देखते हुए गोंडा जिले के पांच विधायक अजय सिंह, प्रेम नारायन पाण्डेय, विनय द्विवेदी, बावन सिंह, प्रभात वर्मा व पूर्व सांसद दद्दन मिश्रा ने गुरुवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। विधायकों ने मांग की थी कि आवागमन बाधित न हो। इसके लिए पहले वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री का निर्देश मिलते ही लोनिवि ने एनएचएआई को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। एनएचएआई के परियोजना निदेशक नकुल प्रकाश वर्मा के अनुसार, मरम्मत का कार्य अब मार्च के मध्य से शुरू होने की संभावना है। प्रयागराज माघ मेले में उपयोग किए गए पांटून पुल को यहाँ लाकर घाघरा नदी पर स्थापित किया जाएगा। उन्हाेंने बताया कि पुल का निर्माण लोक निर्माण विभाग करेगा, जबकि इसका पूरा खर्च एनएचएआई वहन करेगा। पांटून पुल का निर्माण होने से छोटे वाहनों को आवागमन में सुविधा मिलेगी।
इस संबंध में अवर अभियंता अनंत मौर्य ने बताया कि संजय सेतु की मरम्मत को लेकर सभी आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सामग्री, मजदूर और तकनीकी संसाधन मौके पर उपलब्ध हैं और अनुमति मिलते ही मरम्मत कार्य तत्काल शुरू कर दिया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज कुमार चतुवेर्दी
