पौड़ी गढ़वाल, 28 मार्च (हि.स.)। शनिवार को जिलाधिकारी स्वाति एस. भदौरिया ने पुरानी जेल परिसर का स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के बाद जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में स्थानीय नागरिकों और व्यापार सभा के पदाधिकारियों से भी सुझाव लिए गए।

जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि पुराने जेल भवन को पूरी तरह ध्वस्त नहीं किया जाएगा। केवल अत्यधिक जर्जर हिस्सों की मरम्मत की जाएगी, जबकि मजबूत संरचना को सुरक्षित रखते हुए भवन का ऐतिहासिक स्वरूप बनाए रखा जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि जेल से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुओं और विरासत को संरक्षित कर व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियां क्षेत्र के इतिहास से परिचित हो सकें।
उन्होंने बताया कि परिसर की शेष भूमि, जहां वर्तमान में जर्जर कार्यालय भवन हैं, वहां नए कार्यालय कक्ष और पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। साथ ही, मुख्य भवन को संरक्षित कर उसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने की योजना है।
बैठक में विधायक राजकुमार पोरी ने भी पुरानी जेल को जनपद की महत्वपूर्ण धरोहर बताते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसे संग्रहालय के रूप में विकसित करने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी क्षेत्र के इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा।
आर्किटेक्ट मयंक अग्रवाल के प्रस्तुतिकरण के बाद जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि परिसर में संचालित कार्यालयों के लिए नए भवन पारंपरिक पहाड़ी शैली में बनाए जाएं। उन्होंने कार्यदायी संस्था को 10 अप्रैल तक कॉन्सेप्ट प्लान तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए।
प्रभारी पुरातत्व अधिकारी अनिरुद्ध सिंह बिष्ट ने सुझाव दिया कि जेल को हेरिटेज स्वरूप देते हुए गेट, फाइबर प्रतिमाएं, वर्दियां, हथकड़ियां, बेड़ियां, बर्तन और कैदियों से जुड़ी अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं का प्रदर्शन कर आकर्षक संग्रहालय विकसित किया जा सकता है। बैठक में इतिहासकार पद्मश्री डॉ. यशवंत कटोच सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / कर्ण सिंह
