मेदिनीपुर, 17 फरवरी (हि.स.)। पूर्व मेदिनीपुर जिले में सोयादिघी नहर की मरम्मत कार्य की धीमी प्रगति को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। जिला प्रशासन ने 15 अप्रैल तक 20 किलोमीटर लंबी नहर की पूर्ण सफाई और पुनर्मरमम्त का लक्ष्य निर्धारित किया था, किंतु अब तक मात्र 2.8 किलोमीटर हिस्से में ही कार्य पूरा हो सका है। इससे आगामी मानसून से पहले कार्य पूरा होने पर संशय उत्पन्न हो गया है।

जानकारी के अनुसार कोलाघाट के नारायणपाकुड़िया से निकलकर सोयादिघी क्षेत्र में रुपनारायण नदी में मिलने वाली यह नहर पांशकुड़ा, कोलाघाट और शहीद मातंगिनी ब्लॉक के विस्तृत क्षेत्रों के सिंचाई और जलनिकासी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। गत वर्ष सितंबर में कंगसाबती बांध टूटने से पांशकुड़ा में भीषण बाढ़ आई थी। उस समय नहर के जाम होने के कारण बाढ़ का पानी उतरने में काफी समय लगा था। इसके बाद जिला प्रशासन ने नहर के पुनर्मरमम्त का निर्णय लिया और कार्य की जिम्मेदारी वेस्ट बंगाल मिनरल डिस्ट्रीब्यूशन एंड ट्रेडिंग कॉरपोरेशन को सौंपी गई।

‘नो कॉस्ट’ मॉडल के तहत इस परियोजना में राज्य सरकार को प्रत्यक्ष खर्च नहीं करना है। नहर से निकाली गई मिट्टी की बिक्री से ठेकेदार को भुगतान होगा और सरकार को भी राजस्व प्राप्त होगा। हालांकि, वर्तमान में सबसे बड़ी समस्या यही है कि निकाली गई मिट्टी की अपेक्षित बिक्री नहीं हो पा रही है। परिणामस्वरूप बड़ी मात्रा में मिट्टी नहर किनारे जमा की जा रही है। आशंका जताई जा रही है कि मानसून में यही मिट्टी बहकर पुनः नहर में भर सकती है, जिससे अब तक का कार्य प्रभावित होगा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रारंभ में 14-15 मशीनों से खुदाई कार्य चल रहा था, जो अब घटकर आठ-10 मशीनों तक सीमित रह गया है, जिससे कार्य की गति धीमी हो गई है। पूर्व मेदिनीपुर जिला बाढ़-भंगन प्रतिरोध समिति तथा सोयादिघी नहर संस्कार समिति ने हाल ही में जिलाधिकारी और सिंचाई विभाग को संयुक्त ज्ञापन सौंपकर मानसून से पहले कार्य पूर्ण करने की मांग की है।
जिलाधिकारी पूर्णेंदु कुमार माझी ने गत सप्ताह इस विषय पर बैठक की। बैठक में निर्णय लिया गया कि जिले की सभी ईंट भट्ठों को नहर से निकाली गई मिट्टी खरीदने के लिए कहा जाएगा, ताकि कार्य में वित्तीय बाधा दूर हो सके। सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मानसून से पहले सोयादिघी से रामतारक तक लगभग आठ किलोमीटर हिस्से का कार्य पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, शेष कार्य वर्षा ऋतु के बाद किया जाएगा।
इधर, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय पर नहर की पूरी सफाई नहीं हुई तो आगामी वर्षा में पुनः जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। प्रशासन ने कार्य में तेजी लाने का आश्वासन दिया है।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
