रांची, 27 जनवरी (हि.स.)। सदर अस्पकताल, रांची ने सुभद्रा देवी (69) को पित्ताशय की गंभीर समस्या के कारण लेप्रोस्कोपिक कोलेसिस्टेक्टॉमी की आवश्यकता थी। लेकिन उन्हें दूसरी डिग्री एवी ब्लॉक के कारण पहले से पेसमेकर लगा हुआ था। इस जटिल स्थिति के कारण कई निजी अस्पतालों में सर्जरी से इनकार कर दिया गया था, जिससे मरीज और उनके परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही थी।

ऐसे समय में सदर अस्पताल, रांची की एनेस्थीसिया और सर्जरी टीम ने न सिर्फ इस चुनौती को स्वीकार किया, बल्कि पूरी तैयारी, सतर्कता और आपसी समन्वय के साथ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।

इस जटिल सर्जरी में एनेस्थीसिया विभाग की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही।
विभागाध्यक्ष डॉ नीरज कुमार के नेतृत्व में डॉ विकाश वल्लभ, डॉ वसुधा गुप्ता और डॉ ज्योतिका सिंह ने मरीज की पूरी प्री-ऑपरेटिव कार्डियक जांच, पेसमेकर की कार्यक्षमता की समीक्षा और ऑपरेशन के दौरान निरंतर निगरानी सुनिश्चित की।
एनेस्थीसिया तकनीशियन सुरेश, सरोज, अमन और सीमा ने हर स्तर पर तकनीकी सहयोग देकर सर्जरी को सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं सर्जरी विभाग की ओर से विभागाध्यक्ष डॉ अखिलेश झा और डॉ इंदु शेखर ने पूरी सावधानी और अनुभव के साथ लेप्रोस्कोपिक सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया। ऑपरेशन थिएटर की नर्सिंग टीम में संदीप, अमिता और सरिता ने अनुशासन, सतर्कता और समर्पण के साथ पूरी प्रक्रिया को सुचारु बनाए रखा।
ऑपरेशन के दौरान और बाद में मरीज की स्थिति पूरी तरह स्थिर रही और अब वह स्वस्थ होकर सामान्य जीवन की ओर लौट रही हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / Vinod Pathak
