– मध्य प्रदेश पेसा क्रियान्वयन में देश में द्वितीय स्थान पर

भोपाल, 08 फरवरी (हि.स.)। मप्र के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि पेसा अधिनियम मात्र एक कानूनी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनजातीय समाज के स्वाभिमान, परंपराओं और अधिकारों की संवैधानिक पुनर्स्थापना का सशक्त माध्यम है। “जल-जंगल-जमीन” अब केवल नारा नहीं, बल्कि शासन की नीतियों और जमीनी क्रियान्वयन के माध्यम से ठोस वास्तविकता बन चुका है।
मंत्री पटेल रविवार को भोपाल के बरखेड़ी कलां स्थित क्षेत्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज प्रशिक्षण केंद्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय सूचना, शिक्षा एवं संचार प्रशिक्षण सह कार्यशाला के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश आज महाराष्ट्र के बाद पूरे देश में दूसरे स्थान पर है। हाल ही में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में आयोजित राष्ट्रीय पेसा महोत्सव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के जनजातीय खिलाड़ियों ने पुरुष वर्ग कबड्डी में स्वर्ण तथा महिला वर्ग में रजत पदक अर्जित कर उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है, जो राज्य के लिए गौरव का विषय है।
मंत्री पटेल ने कहा कि राज्य टीम के समन्वित प्रयासों से पेसा क्षेत्रों में अब तक 900 से अधिक नई ग्राम सभाओं का गठन किया जा चुका है। साथ ही ग्राम सभाओं की शांति एवं विवाद निवारण समितियों द्वारा 11 हजार से अधिक प्रकरणों का पारंपरिक चौपालों के माध्यम से समाधान किया गया है, जो सामुदायिक न्याय व्यवस्था की सुदृढ़ता का प्रमाण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खनन पट्टों, लघु वनोपज के संग्रहण तथा ग्राम स्तर की शांति व्यवस्था जैसे विषयों पर ग्राम सभा की भूमिका सर्वोपरि है।
मंत्री पटेल ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल फाइलों की गति से नहीं, बल्कि धरातल पर दिखाई देने वाले परिवर्तन से आंकी जानी चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत ग्राम सभाओं को प्रशासनिक बाधाओं से मुक्त रखें तथा जिला एवं विकासखंड समन्वयक केवल प्रतिवेदन तक सीमित न रहकर ग्राम सभाओं को जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कलेक्टर्स को जिला स्तर पर तथा एसडीओ (राजस्व) को अनुविभाग स्तर पर नियमित पाक्षिक समीक्षा सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।
मंत्री पटेल ने कहा कि आगामी वित्तीय वर्ष में ग्राम सभाओं को सीधे वित्तीय राशि हस्तांतरित करने की तैयारी की जा रही है, जिससे स्थानीय स्वशासन की अवधारणा को और अधिक बल मिलेगा। उन्होंने विभिन्न गतिविधियों में स्थानीय भाषाओं, लोकगीतों, नुक्कड़ नाटकों एवं हाट-बाजारों जैसे पारंपरिक माध्यमों को शामिल करने पर बल दिया, जिससे पेसा कानून का संदेश समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचे। साथ ही उन्होंने तकनीकी दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से सचिवों एवं मोबिलाइजरों को ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के प्रभावी उपयोग के लिये प्रशिक्षण देने के निर्देश भी दिए।
मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने पेसा कानून के प्रभावी और निष्ठापूर्वक क्रियान्वयन का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी, पारदर्शिता और समन्वित प्रयासों से अनुसूचित क्षेत्रों में विकास की नई धारा स्थापित होगी।
हिन्दुस्थान समाचार / मुकेश तोमर
