नालंदा, बिहारशरीफ 10 फ़रवरी (हि.स.)। नालंदा जिले में फाइलेरिया उन्मूलन हेतु मॉडल सदर अस्पताल बिहार शरीफ में मंगलवार को डीएम ने बच्चों को फाइलेरिया से बचाव हेतु निर्धारित दवा की खुराक खिलाकर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस मौके पर डीएम ने कहा कि फाइलेरिया एक गंभीर लेकिन पूरी तरह से रोके जाने योग्य बीमारी है। इसके उन्मूलन के लिए सरकार द्वारा सामूहिक दवा सेवन अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें सभी पात्र व्यक्तियों को दवा का सेवन सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी भ्रांति में न पड़ें और स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दी जा रही दवाओं का सेवन अवश्य करें। नालंदा जिले में फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 10 फरवरी से 24 फरवरी तक एमडीए कार्यक्रम जिले के 11 प्रखंडों (बिहारशरीफ शहरी क्षेत्र, बिंद, चंडी, एकंगरसराय ,इस्लामपुर,नूरसराय, परवलपुर, रहुई, सरमेरा, सिलाव एवं थरथरी प्रखंड में प्रारंभ किया गया है ।

प्रारम्भिक तिथि 10 फ़रवरी से 24 फरवरी तक (घर घर कार्यक्रम 14 दिनों तक चलेगा उसके बाद 25 फरवरी से 27 फरवरी तक स्कूल, कार्यालय, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, बस स्टैंड आदि स्थानों पर बहुत कैंप लगाया जाएगा वहीं 11 फरवरी को मेगा कैंप आंगनबाड़ी केंद्रों पर लगाए जाएंगे।
इस कार्य के लिए जिलेभर में 1812203कुल लाभार्थियों चिन्हित किए गये है जिसके लिए 82 प्रवेक्षक लगाये गये है साथ हीं – 847टीम में 1694 स्वास्थ्य सदस्य और जीविका सदस्य को कार्य सौंपा गया है वहीं मेगा कैंप के लिए 561 केंद्र बनाये गये है।
इस संबंध में सीएस ने बताया कि फाइलेरिया बीमारी जो कि हाथीपांव के नाम से जाना जाता है, मच्छर के काटने से होती है । यह दिव्यांगता करने वाली विश्व की दूसरी सबसे बड़ी बीमारी है, जिसके कारण इसे काफी गंभीर माना जाता है, यह शरीर के हाथ, पैर के अलावा शरीर के कई अंगों को भी प्रभावित करता है। इस बीमारी का पता चलने में 5 से 15 वर्ष तक का समय लग जाता हैं, इस बीमारी से बचाव के लिए साल में सिर्फ एक बार फाइलेरिया रोधी दवा से ही बचाव किया जा सकता है। यह दवा दो वर्ष से छोटे बच्चों, गर्भवती महिला एवं अत्यधिक बीमार वयस्क को छोड़कर सभी लोगों को खाना है। यह दावा आशा कार्यकर्ता, एएनएम के द्वारा घर-घर जाकर खिलाया जाता है।
उन्होंने बताया कि कुछ लोगों को इन दवाओं के मामूली प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं जो कि शुभ संकेत है। शरीर के अंदर फाइलेरिया के कीड़े मरने के कारण सरदर्द, उल्टी, चक्कर, बुखार इत्यादि हो सकते हैं। इससे घबराने की आवश्यकता नहीं है। अगर ऐसा होता है तो चिंता करने के बजाय इस बात की खुशी मनाएं कि आपको इस खतरनाक बीमारी से मुक्ति मिल रही है। वहीं जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश देते हुए कहा कि प्रभावित चिन्हित व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस एवं अस्पताल में उपचार ससमय उपलब्ध करेंगे ।इस बीमारी के बचाव हेतु दो प्रकार की दवा डेक एवं अलवंडाजोल ही खिलाई जाती है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग (महादलित विकास मिशन) विभाग की महत्वपूर्ण गतिविधियों के तहत विकास मित्र, महादलित टोले में एम.डी.ए. कार्यक्रम के संबंध में प्रचार-प्रसार करेंगे एवं लोगों को दवा खाने हेतु प्रेरित करेंगे। 10 फरबरी से दवा खिलाने में ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर (आशा एवं वॉलिन्टियर) को सहयोग के लिए लगाया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रमोद पांडे
