शिमला, 02 फ़रवरी (हि.स.)। केंद्र सरकार के बजट 2026-27 में हिमाचल प्रदेश के रेलवे विकास को बड़ी प्राथमिकता दी गई है। बजट में राज्य के लिए रेलवे क्षेत्र में 2,911 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसे केंद्र सरकार अब तक का सबसे बड़ा वार्षिक आवंटन बता रही है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार यह राशि वर्ष 2009 से 2014 के बीच हुए औसत सालाना आवंटन के मुकाबले करीब 27 गुना अधिक है। उस समय हिमाचल के लिए रेलवे बजट का औसत सालाना आवंटन करीब 108 करोड़ रुपये रहा था।
सरकार का कहना है कि इस बढ़े हुए बजट का मकसद हिमाचल में रेलवे ढांचे को मजबूत करना और कनेक्टिविटी में सुधार लाना है। मौजूदा समय में राज्य में रेलवे से जुड़े करीब 17,711 करोड़ रुपये के काम प्रगति पर हैं। इनमें नई रेलवे लाइनों का निर्माण, स्टेशनों का पुनर्विकास और सुरक्षा से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल हैं। इन परियोजनाओं के जरिए पहाड़ी राज्य में रेल यात्रा को ज्यादा सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की बात कही जा रही है।
बजट के तहत अमृत स्टेशन योजना पर भी खास ध्यान दिया गया है। हिमाचल प्रदेश के चार रेलवे स्टेशनों को इस योजना के तहत पूरी तरह से आधुनिक बनाने के लिए चुना गया है। इन स्टेशनों के पुनर्विकास पर कुल 46 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। सरकार के अनुसार अब तक बैजनाथ पपरोला और अंब अंदौरा रेलवे स्टेशनों पर काम पूरा हो चुका है, जबकि अन्य स्टेशनों पर निर्माण और आधुनिकीकरण का काम जारी है।
कनेक्टिविटी के मोर्चे पर भी बजट में किए गए प्रावधानों का असर दिखने लगा है। हिमाचल प्रदेश में वंदे भारत एक्सप्रेस की एक जोड़ी ट्रेन सेवाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे राज्य को देश के अन्य हिस्सों से तेज और बेहतर रेल संपर्क मिल रहा है। सरकार का दावा है कि इससे पर्यटन और स्थानीय लोगों की आवाजाही को बढ़ावा मिलेगा।
रेलवे नेटवर्क के विस्तार को लेकर सरकार का कहना है कि वर्ष 2014 के बाद से हिमाचल प्रदेश में करीब 16 किलोमीटर नई रेलवे लाइन का निर्माण किया गया है। इसके साथ ही राज्य में रेलवे नेटवर्क का शत-प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर लिया गया है। सुरक्षा और यातायात को सुचारू बनाने के लिए प्रदेश में 26 फ्लाईओवर और अंडरपास भी बनाए गए हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / उज्जवल शर्मा
