जगदलपुर, 18 मार्च (हि.स.)। बस्तर जिले में शिक्षा और ज्ञान की नई अलख जगाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक अत्यंत सराहनीय और अनूठी पहल की जा रही है। कलेक्टर आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में आगामी 19 मार्च से पूरे जिले में ‘पुस्तक दान अभियान’ का विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से घरों की अलमारियों में रखी पुरानी और उपयोगी किताबों को उन जरूरतमंद हाथों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है, जो संसाधनों के अभाव में ज्ञान की मुख्यधारा से दूर रह जाते हैं।

जिला प्रशासन ने इस पुनीत कार्य में सहयोग के लिए समस्त आम जनता, जनप्रतिनिधियों, शासकीय अधिकारियों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से भावुक अपील की है। अपील में कहा गया है कि आपके पास रखी पुरानी ज्ञानवर्धक पुस्तकें, महापुरुषों की प्रेरणादायक जीवनियाँ, सामान्य ज्ञान की किताबें और समय के महत्व को बताने वाला साहित्य किसी विद्यार्थी के जीवन की दिशा बदल सकता है। यह अभियान न केवल पुरानी किताबों को नया जीवन देगा, बल्कि समाज में ‘दान’ की एक नई और बौद्धिक संस्कृति को भी विकसित करेगा।
इस महाभियान को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा एक विशेष ‘पुस्तक दान रथ’ तैयार किया गया है, जो जिले के समस्त विकासखंडों में निर्धारित रूट चार्ट के अनुसार भ्रमण करेगा। अभियान का आगाज 19 मार्च को सुबह 11 बजे जिला कलेक्ट्रेट परिसर से होगा, जहाँ से यह रथ जगदलपुर शहर के प्रमुख चौक-चौराहों जैसे पावर हाउस चौक, डोंगरीपारा, कोहकापाल, धरमपुरा और नया बस स्टैंड से होते हुए सिटी कोतवाली तक पहुचेगा।
पुस्तक दान का यह अभियान सिलसिलेवार तरीके से अगले सात दिनों तक बस्तर के कोने-कोने में पहुँचेगा। 20 मार्च को तोकापाल के एर्राकोट और करंजी क्षेत्रों में, 21 मार्च को बास्तानार और किलेपाल में तथा 22 मार्च को दरभा और तीरथगढ़ के अंचलों में यह रथ भ्रमण कर पुस्तकें संग्रहित करेगा। इसी क्रम में 23 मार्च को बकावण्ड और राजनगर, 24 मार्च को लोहण्डीगुड़ा और चित्रकोट तथा अंतिम दिन 25 मार्च को बस्तर विकासखंड के भानपुरी और केसरपाल जैसे क्षेत्रों में यह अभियान चलाया जाएगा।
पुस्तक दान अभियान में एकत्रित की गई इन बहुमूल्य पुस्तकों को जिला ग्रंथालय एवं विकासखंड स्तर पर स्थित पुस्तकालयों में पूरी संजीदगी के साथ संरक्षित किया जाएगा। यहाँ से ये पुस्तकें उन जिज्ञासु पाठकों और जरूरतमंद विद्यार्थियों तक पहुँचेंगी, जो अपने भविष्य को संवारने के लिए ज्ञान अर्जित करना चाहते हैं। जिला प्रशासन का मानना है कि जन-सहयोग से खड़ी की गई यह ज्ञान की विरासत बस्तर के शैक्षणिक परिदृश्य में एक मील का पत्थर साबित होगी। सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों को इस कार्य हेतु नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इस प्रेरणादायी मुहिम से जोड़ा जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे
