पुरुलिया, 21 फ़रवरी (हि.स.)।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के एक प्रवासी श्रमिक की दूसरे राज्य में काम करने के दौरान फिर रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई। महाराष्ट्र के पुणे के बाद इस बार कर्नाटक के बेंगलुरु में यह घटना सामने आई है। मृत प्रवासी श्रमिक का नाम प्रसन्न कुमार (39) है। उनका घर पुरुलिया जिले के झालदा-दो ब्लॉक के चेक्या ग्राम पंचायत के चेक्या गांव में है, जो कोटशिला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आता है। अतिरिक्त आय की उम्मीद में वह पिछले वर्ष फरवरी में बेंगलुरु काम करने गए थे। इसके बाद कई बार घर लौटने की इच्छा जताने के बावजूद वह वापस नहीं आ सके। परिवार का आरोप है कि ठेकेदार संस्था उन्हें रोककर रखती थी। यहां तक कि तीन चार बार वह छिपकर कार्यस्थल से स्टेशन पहुंचे, लेकिन ठेकेदार संस्था उन्हें वापस ले गई।

पिछले गुरुवार को प्रसन्न की परिवार से अंतिम बार बातचीत हुई थी। उस समय भी उन्होंने बहुत जल्द घर लौटने की बात कही थी। लेकिन इसी बीच शुक्रवार को उसी राज्य में सोते हुए उनकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि उनकी हत्या की गई है। परिजनों के अनुसार प्रसन्न के सिर, दाहिने हाथ की उंगलियों और नाक पर चोट के निशान हैं। घटना की जांच की मांग परिवार ने की है।
घटना की जानकारी मिलने के बाद तृणमूल कांग्रेस के सर्वभारतीय महासचिव एवं सांसद अभिषेक बनर्जी मृत प्रवासी श्रमिक के परिवार के साथ खड़े हुए हैं। उनके प्रयास से शव को शीघ्र घर लाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। साथ ही परिवार के साथ रहने का आश्वासन भी दिया गया है। डायमंड हार्बर के सांसद ने कानूनी सहायता से लेकर आवश्यक हर प्रकार की मदद करने की बात कही है।
प्रसन्न का परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। घर में पत्नी और दो बेटे हैं। एक बेटे ने इस वर्ष माध्यमिक परीक्षा दी है, जबकि दूसरा नौवीं कक्षा का छात्र है। इन्हें छोड़कर प्रसन्न फरवरी 2025 में बेंगलुरु गए थे। बेंगलुरु के सम्पिगेहल्ली थाना क्षेत्र की एक निजी संस्था में वह चालक के रूप में कार्यरत थे। यह काम वह ठेकेदार सुषेन कुमार तिवारी के अधीन करते थे। परिवार का आरोप है कि लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी उन्हें घर लौटने नहीं दिया गया। इस बात को लेकर वह पत्नी कुंती कुमार और परिवार से अपनी पीड़ा व्यक्त करते थे।
गुरुवार रात तक पत्नी से उनकी बातचीत हुई थी और उन्होंने जल्द घर लौटने का भरोसा दिया था। लेकिन अगले दिन शुक्रवार सुबह से उनसे संपर्क नहीं हो सका, जिससे परिवार की चिंता बढ़ने लगी। बार-बार फोन करने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। इसी बीच फोन पर परिवार को सूचना दी गई कि प्रसन्न अब नहीं रहे और सोते हुए उनकी मृत्यु हो गई। इसके बाद परिवार शोक में डूब गया। मृतक के साले गुरुबंथ कुमार ने आरोप लगाया कि प्रसन्न की हत्या की गई है और उनके दाहिने हाथ की उंगलियों, सिर तथा नाक पर चोट के निशान हैं।
परिजनों का यह भी आरोप है कि उन्हें घर लौटने नहीं दिया गया और 20 हजार रुपये वेतन देने का वादा होने के बावजूद नियमित भुगतान नहीं किया जाता था। परिवार ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। शुक्रवार को शव बरामद होने के बावजूद शनिवार शाम तक पोस्टमार्टम नहीं होने की बात सामने आई। पुरुलिया जिला तृणमूल ट्रेड यूनियन कांग्रेस के जिला अध्यक्ष उज्ज्वल कुमार ने बताया कि परिवार से सूचना मिलने के बाद शव जल्द वापस लाने की कोशिश की गई, लेकिन वहां की पुलिस से सहयोग नहीं मिला। इसके बाद कोलकाता जाकर उन्होंने अभिषेक बनर्जी के कार्यालय से संपर्क किया, जिसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ी। हालांकि शनिवार शाम तक पोस्टमार्टम नहीं हुआ था।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता
