मंदसौर, 19 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले गांधीसागर जलाशय में अवैध रूप मछली पकड़ने वालों के खिलाफ पुलिस, वन एवं राजस्व विभाग ने संयुक्त रूप से बड़ी कार्रवाई की है। ग्राम संजीत में करंट लगाकर मछलियों और जलीय जीवों का शिकार करने वाले तीन आरोपियों को शनिवार रात गिरफ्तार किया गया है।

जानकारी के अनुसार गांधीसागर जलाशय के बैकवॉटर क्षेत्र—गरोठ, बसई, संजीत, रामपुरा और चचोर में लंबे समय से मछली माफिया सक्रिय थे। ठेका निरस्त होने के बावजूद बाहरी लोग अवैध रूप से करंट का उपयोग कर बड़े पैमाने पर मछलियों का शिकार कर रहे थे। सूचना मिलने पर प्रशासनिक महकमे ने संजीत क्षेत्र के ग्राम मगरा में दबिश दी, जहां बिना लाइसेंस के मछली के शिकार का मामला सामने आया। टीम को मौके से करंट लगाने वाले उपकरण भी बरामद हुए। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की।
पश्चिम बंगाल के तीन आरोपी गिरफ्तार
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुकांत सरकार, सुजान विश्वास और देवव्रत विश्वास के रूप में हुई है। पूछताछ में इनके पास मत्स्याखेट का कोई वैध लाइसेंस नहीं पाया गया। पुलिस ने आरोपियों के ठिकाने से 4 बैटरियां, 3 यूपीएस/आईपीएस, विद्युत तार और अन्य उपकरण बरामद किए हैं। बताया गया कि किराए के कमरे से अंडरग्राउंड वायरिंग के जरिए नदी में करंट प्रवाहित किया जाता था।
मछलियों के साथ अन्य जलीय जीव भी हुए शिकार
करंट के जरिए शिकार से न केवल मछलियों की बड़ी संख्या में मौत हुई बल्कि अन्य जलीय जीव भी इसकी चपेट में आ रहे थे। इससे पूरे जल पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंच रहा था। मौके के वीडियो भी सामने आए जिसमें मरी हुई मछलियों और मगरमच्छ दिखाई दिए।
पूरे मामले को लेकर एसडीओपी कीर्ति बघेल ने बताया कि नाहरगढ़ थाने में सूचना प्राप्त हुई थी कि कुछ लोगों द्वारा करंट लगाकर मछलियों का शिकार किया जा रहा है। वन विभाग और पुलिस के द्वारा एक घर को तलाश किया गया जहां से करंट लगाने संबंधित उपकरणों किए गए हैं। थाना नाहरगढ़ में अपराध दर्ज कर पश्चिम बंगाल निवासी 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही वन विभाग के द्वारा जब सर्च किया गया था नदी से मगरमच्छ भी मृत अवस्था में मिले हैं। यह लोग बैकवॉटर क्षेत्र में करंट छोड़ कर मछलियों का शिकार करते थे। आरोपियों ने प्रारंभिक पूछताछ में बताया कि यह पिछले करीब 2 महीने से करंट लगाकर इसी तरह मछलियों का शिकार कर रहे थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अशोक झलोया
