दतिया/भांडेर, 09 मार्च (हि.स.)। भारतीय भाषाओं की जननी संस्कृत सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को समृद्ध करने का सशक्त माध्यम है। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के दतिया जिला क्षेत्र में संस्कृत शिक्षा से जुड़े संस्थानों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

जिले के भांडेर नगर के मेला ग्राउंड स्थित संस्कृत उच्च विद्यालय का छात्रावास जर्जर हालत में पहुंच चुका है और वर्षों से उपेक्षा का शिकार बना हुआ है।
कभी विद्यार्थियों के रहने के लिए बनाए गए इस छात्रावास की हालत अब इतनी खराब हो चुकी है कि इसकी दीवारें और छतें टूटने लगी हैं। देखरेख के अभाव में भवन पूरी तरह खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। हालत यह है कि लंबे समय से यहां विद्यार्थियों के बजाय मवेशी बांधे जा रहे हैं, जिससे परिसर में गंदगी और दुर्गंध फैल गई है।
बताया जाता है कि इस छात्रावास का निर्माण उस समय किया गया था, जब शिक्षा आम लोगों की पहुंच से काफी दूर थी। उस दौर में भांडेर का संस्कृत विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में मील का पत्थर माना जाता था। वर्तमान में यहां लगभग 100 छात्र अध्ययन कर रहे हैं। यह विद्यालय वर्ष 1935 से संचालित हो रहा है, जहां कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं।
छात्रावास जर्जर होने के कारण छात्र-छात्राओं को किराये के भवनों में रहकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस ऐतिहासिक छात्रावास भवन की मरम्मत और पुनर्निर्माण की ओर न तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान है और न ही प्रशासन कोई पहल कर रहा है।
परिसर में आवारा मवेशियों के डेरा डालने से गंदगी का अंबार लग गया है। इससे आसपास से गुजरने वाले लोगों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि छात्रावास भवन की जल्द मरम्मत कर इसे पुनः विद्यार्थियों के उपयोग के लिए तैयार कराया जाए, ताकि संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार/संतोष तिवारी
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा
