मुंबई,15 मार्च ( हि . स.) । ठाणे के प्रादेशिक मनोरोग अस्पताल के चिकित्सकों और स्टाफ़ की भावनात्मक कोशिशों की वजह से, 13 साल पहले अपने घर से लापता हुए एक मानसिक रूप से बीमार आदमी को मध्य प्रदेश से उसके परिवार के पास सफ़लतापूर्वक ‘वापस’ लाया गया है। ठाणे का यह अस्पताल पिछले दो महीनों से इस मरीज़ का पता ढूंढने की लगातार कोशिश कर रहा था, जो कि बहुत कम बोलता था और अपनी पहचान नहीं बता पा रहा था। आख़िरकार, शुक्रवार को मरीज़ भावनात्मक तरीके की मदद से वह अपने परिवार से मिल पाया।

लगभग 13 साल पहले, अफ़ज़ल (बदला हुआ नाम), एक मानसिक रूप से बीमार आदमी, मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन की सीमा में घूमता हुआ मिला था। क्योंकि वह अपने बारे में कोई जानकारी नहीं दे रहा था, इसलिए पुलिस ने उसे पाँच महीने पहले इलाज के लिए ठाणे के राज्यस्तरीय मनो रोग चिकित्सा अस्पताल में भर्ती कराया था। उस समय उसकी हालत बहुत गंभीर व नाजुक थी। अस्पताल के चिकित्सा विभाग अधीक्षक डॉ. नेताजी मुलिक की देखरेख और मनोचिकित्सक डॉ. आशीष पाठक की देखरेख में मरीज का इलाज शुरू किया गया। शुरू में उसने अपने बारे में कोई साफ जानकारी नहीं दी। उसे ट्रेस करना मुश्किल ही नहीं बल्कि नामुमकिन लग रहा था क्योंकि वह बांद्रा, दिल्ली, मध्य प्रदेश या उत्तर प्रदेश जैसे अलग-अलग पते बताता था, सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट सतीश वाघ ने बताया।
इस बीच, जब हॉस्पिटल में लगातार इलाज और काउंसलिंग चल रही थी, तो 7 मार्च को अफजल ने अपने गांव का नाम रामनगर, जिला सतना (मध्य प्रदेश) बताया। इस जानकारी के आधार पर हॉस्पिटल ने तुरंत सतना पुलिस स्टेशन से कॉन्टैक्ट किया और मरीज की जानकारी और फोटो अपने ऑफिसर विजय त्रिपाठी को भेजी। लोकल लेवल पर सर्च करने के बाद सिर्फ एक घंटे में मरीज के रिश्तेदार मिल गए। हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने रिश्तेदारों से वीडियो कॉल के जरिए मरीज की पहचान कन्फर्म की। उसके बाद मरीज का भतीजा, भाभी और दूसरे रिश्तेदार तुरंत ठाणे पहुंचे।
डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ. प्राची चिवटे, सोशल सर्विस सुपरिटेंडेंट सतीश वाघ, साइकेट्रिस्ट नर्स मानसी दुखंडे, तेजस्विनी पवार और दूसरे स्टाफ ने बहुत मेहनत की।
मध्य प्रदेश के अपनी यादाश्त खो चुके अफजल के दोस्त सलीम ने बताया है किअफजल पढ़ा-लिखा स्नातक है और उसे लिखने का बहुत शौक था। लेकिन, उसकी बिगड़ती मेंटल कंडीशन की वजह से वह अचानक घर छोड़कर चला गया। हमने उसे बहुत ढूंढा, लेकिन वह नहीं मिला। हमने उम्मीद छोड़ दी थी। ठाणे रीजनल हॉस्पिटल के चिकित्सकों उन्हें फरिश्ता की तरह लगे हैं उन्होंने अफजल के लिए जो प्यार और इंसानियत दिखाई, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा
