पश्चिमी सिंहभूम, 21 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा के सांसद विद्युत वरण महतो ने विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि संसद में महिलाओं से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों का विरोध कर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने अपनी महिला-विरोधी सोच उजागर कर दी है। उन्होंने कहा कि नीति-निर्माण में महिलाओं की भागीदारी उनका अधिकार है, लेकिन विपक्ष ने इसे टालने की कोशिश की।

मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय बासाटोंटो, चाईबासा में आयोजित प्रेस वार्ता में सांसद महतो ने कहा कि 16 और 17 अप्रैल को संसद में पेश अहम विधेयकों पर विपक्ष का रवैया दुर्भाग्यपूर्ण रहा। उन्होंने कहा कि सभी जनप्रतिनिधियों को दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देशहित में निर्णय लेना चाहिए।
सांसद ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि परिसीमन प्रक्रिया से किसी भी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि दक्षिण भारत सहित सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व सुरक्षित और मजबूत होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन का उद्देश्य एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत को लागू करना है।
प्रेस वार्ता में भाजपा नेताओं ने कहा कि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक लोकतंत्र को सशक्त करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। पार्टी का आरोप है कि विपक्ष इन विधेयकों का विरोध कर महिला आरक्षण को लागू होने से रोकना चाहता है।
सांसद ने समाजवादी पार्टी पर धर्म आधारित आरक्षण की मांग को असंवैधानिक बताते हुए निशाना साधा, वहीं टीएमसी और डीएमके पर भ्रामक प्रचार फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम का क्रियान्वयन परिसीमन से जुड़ा हुआ है और इसमें देरी करना महिलाओं के अधिकारों में देरी के समान है।
प्रेस वार्ता में भाजपा जिला अध्यक्ष गीता बालमुचू, पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार साव, वरिष्ठ नेता जेबी तुबिद, नगर अध्यक्ष राकेश पोद्दार, जिला उपाध्यक्ष रंजन प्रसाद और जिला महामंत्री भूषण पाठ पिंगुवा सहित कई नेता उपस्थित थेे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक
