
जयपुर, 08 फ़रवरी (हि.स.)। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि राजस्थान का पत्थर केवल निर्माण सामग्री नहीं, बल्कि समय, सभ्यता और स्थायित्व का मौन साक्ष्य है। अरावली पर्वतमाला से प्राप्त सैंडस्टोन, मार्बल, ग्रेनाइट और लाइमस्टोन ने भारत को विश्व में मजबूती और विशिष्ट पहचान दिलाई है।

वे रविवार को जेईसीसी सीतापुरा में आयोजित स्टोन मार्ट 2026 कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

देवनानी ने कहा कि भरतपुर का सैंडस्टोन, मकराना का मार्बल और जैसलमेर का पीला पत्थर आज वैश्विक स्तर पर राजस्थान की पहचान बने हुए हैं। दिल्ली का लाल किला, संसद भवन सहित देश की अनेक ऐतिहासिक इमारतें राजस्थान के पत्थरों की स्थायित्व क्षमता का जीवंत उदाहरण हैं। विदेशों में भी सार्वजनिक भवनों और स्मारकों में राजस्थान के पत्थरों का सम्मान के साथ उपयोग किया गया है।
विधानसभा अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में अवसंरचना और धरोहर संरक्षण के क्षेत्र में प्राकृतिक पत्थर को पुनः प्राथमिकता दिए जाने की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेंट्रल विस्टा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, महाकाल लोक और अयोध्या धाम जैसे प्रोजेक्ट इस बात का प्रमाण हैं कि भारत ने अस्थायी सामग्रियों के बजाय स्थायी पत्थर आधारित निर्माण की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाया है।
देवनानी ने पत्थर उद्योग से जुड़े उद्यमियों से नवाचार, आधुनिक तकनीक और पर्यावरणीय संतुलन को अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने डिजिटल कटिंग, रोबोटिक फिनिशिंग, अल्ट्रा-थिन स्लैब और सस्टेनेबल स्टोन आर्किटेक्चर को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि राजस्थान केवल पत्थर का निर्यातक ही नहीं, बल्कि वैश्विक पत्थर नवाचार का केंद्र भी बन सकता है।
उन्होंने कहा कि जो सभ्यताएं पत्थर पर भरोसा करती हैं, वे समय पर भी भरोसा रखती हैं। राजस्थान का पत्थर बिना बोले यह संदेश देता है कि स्थायित्व ही विकास की सबसे सशक्त नींव है।
—————
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित
