– राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने शोणितपुर जिले की आध्यात्मिक परंपराओं की सराहना की

शोणितपुर (असम), 08 फरवरी (हि.स.)। असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने रविवार काे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री अशोक सिंघल की उपस्थिति में शोणितपुर जिले के ढेकियाजुली के हिंदू वैदिक क्षेत्र में नवनिर्मित शिव मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए, राज्यपाल आचार्य ने कहा कि ढेकियाजुली की ऐतिहासिक भूमि पर प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भाग लेना उनके लिए अपार खुशी और आध्यात्मिक संतुष्टि का क्षण था। उन्होंने कहा कि असम हमेशा से सांस्कृतिक समृद्धि और आध्यात्मिक चेतना से भरपूर भूमि रही है।
राज्यपाल ने कहा कि महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्रीश्री माधवदेव की आध्यात्मिक शिक्षाओं ने असम के सामाजिक ताने-बाने को जीवंत रखा है, जबकि प्राचीन शैव परंपरा पूरे क्षेत्र में फलती-फूलती रही है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव के प्रति भक्ति लोगों के आध्यात्मिक जीवन में गहराई से बसी हुई है, और नव-प्रतिष्ठित मंदिर इस स्थायी आस्था का प्रतीक है।
प्राण प्रतिष्ठा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, राज्यपाल ने कहा कि यह समारोह देवता में दिव्य ऊर्जा का आह्वान करता है और व्यक्तियों को मूल्यों, अनुशासन और सदाचार के माध्यम से आंतरिक चेतना को जगाने की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे पवित्र अवसर आध्यात्मिक विकास और सामूहिक सामाजिक सद्भाव दोनों को प्रेरित करते हैं।
शोणितपुर के ऐतिहासिक महत्व का जिक्र करते हुए, राज्यपाल ने कहा कि यह क्षेत्र कभी महान शिव भक्त राजा बाणासुर की राजधानी था, सदियों से शैव पूजा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। उन्होंने तेजपुर में महाभैरव मंदिर और ढेकियाजुली में गुप्तेश्वर महादेव मंदिर जैसे पूजनीय तीर्थस्थलों का भी उल्लेख किया, जो इस जीवंत आध्यात्मिक परंपरा के निरंतर प्रतीक हैं।
राज्यपाल ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत काशी विश्वनाथ धाम, केदारनाथ, बद्रीनाथ, सोमनाथ और अयोध्या जैसी ऐतिहासिक परियोजनाओं के माध्यम से अपनी शाश्वत सनातन विरासत से फिर से जुड़ रहा है, जो एक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को दर्शाता है।
मंत्री अशोक सिंघल की भूमिका की सराहना करते हुए, राज्यपाल आचार्य ने कहा कि यह मंदिर, जिसका निर्माण 2022 में शुरू हुआ था, उनकी दूरदर्शी सोच और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि मंदिर पूजा स्थलों के अलावा सामाजिक एकता, नैतिक शिक्षा और सामूहिक सद्भाव के केंद्र भी हैं।
इस कार्यक्रम में सांसद रंजीत दत्ता, असम के मुख्य सचिव डॉ. रवि कोटा, अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय महासचिव स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, वाराणसी से श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. श्रीकांत मिश्रा, विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अशोक यादव समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। ——————
हिन्दुस्थान समाचार / अरविन्द राय
