ईटानगर, 4 दिसंबर (हि.स.)। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल, लेफ्टिनेंट जनरल केटी परनाइक (सेवानिवृत्त) ने पूरे राज्य, विशेष रूप से आदि समुदायों को पोदी बार्बी के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह पर्व राज्य की एकता को और मजबूत करेगा और हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को और निखारेगा।

राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा कि त्याेहार, अनुष्ठान और उत्सव समाज की सांस्कृतिक पहचान के अहम हिस्सा हैं। ये आदि समुदायों के आनंद, सद्भाव और साझा अपनत्व को दर्शाते हैं। वे कृषि प्रधान चरित्र से जुड़े हैं और सदियों से ईश्वरीय कृपा, फसल की समृद्धि व सभी की भलाई के लिए प्रार्थना का माध्यम रहे हैं।

उन्होंने डोनयी पोलो से राज्य में शांति, समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की।
पोदी बार्बी अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले में आदि जनजाति के रामो, पाई-लिबो और बोकर समुदाय द्वारा मनाया जाने वाला एक प्रसिद्ध कृषि उत्सव है। यह उत्सव हर साल दिसंबर में फसल कटाई के मौसम में मनाया जाता है और प्रकृति की देन के लिए आभार व्यक्त करने तथा आने वाले वर्ष में फिर से अच्छी फसल के लिए प्रार्थना करने का अवसर होता है।
पोदी बार्बी का नाम एक छोटे क्रिकेट जैसे प्रवासी कीट से आया है, जो फसल कटाई के समय इस क्षेत्र में आता है। प्राचीन समय में लोग इसी कीट के आगमन को फसल कटाई का संकेत मानते थे। इस उत्सव में जानवरों की बलि दी जाती है और पुजारी (न्यूबू) द्वारा विशेष रीति-रिवाज किए जाते हैं।
पोदी बार्बी उत्सव के दौरान पुरुष और महिलाएं पारंपरिक पोशाक पहनते हैं और मिलजुल कर खुशियां मनाते हैं। लोकल वाइन ‘ओपोंग’ बनाई जाती है और पारंपरिक गीत (जयिंग और बारी) गाए जाते हैं, जिन्हें बुजुर्ग लोग गाते हैं और युवा पारंपरिक नृत्य करते हैं।
इस क्षेत्र के लोग मुख्य रूप से मक्का, बाजरा और धान की खेती करते हैं, लेकिन पहाड़ी इलाकों में धान की खेती कम होती है। उत्सव के अंतिम दिन मेहमानों को वाइन और विशेष व्यंजन वितरित किए जाते हैं।
इस तरह, पोड़ी-बर्बी उत्सव अरुणाचल प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है और कृषि, समुदाय और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को बढ़ावा देता है।
हिन्दुस्थान समाचार / तागू निन्गी
