रायपुर, 10 फ़रवरी (हि.स.)। देवभाषा संस्कृत के संरक्षण और उसके वैश्विक प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से कार्य कर रही संस्था ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ ने ‘रामायण वार्ता’ के लिए सरगुजा से सांसद चिंतामणि महाराज को राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है।

इस संबंध में चिंतामणि महाराज ने कहा कि यह मेरे लिए और मेरे क्षेत्रवासियों के लिए अत्यंत हर्ष और गौरव का विषय है । ‘रामायण रिसर्च काउंसिल‘ के तत्वावधान में संचालित प्रकल्प “रामायण वार्ता”—जिसका उद्देश्य देवभाषा संस्कृत के शिक्षण, प्रशिक्षण तथा संस्कृत भाषा में प्रकाशित पाक्षिक पत्रिका “रामायण वार्ता” के संचालन के माध्यम से संस्कृत के व्यापक प्रसार को सुनिश्चित करना है ।इसके लिए मुझे राष्ट्रीय अध्यक्ष की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।

संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के इस पावन दायित्व के लिए मुझ पर जताए गए विश्वास के लिए मैं अपने संसदीय क्षेत्र की ओर से रामायण रिसर्च काउंसिल परिवार के कुमार सुशांत, पीताम्बर मिश्रा, राजेश सिंह और आनंद सिंह का आभार व्यक्त करता हूँ। यह दायित्व निश्चित रूप से देवभाषा संस्कृत के गौरव को जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास सिद्ध होगा।
रामायण रिसर्च काउंसिल देशभर में संस्कृत शिक्षण और प्रशिक्षण का व्यापक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने जा रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत होने के बाद चिंतामणि महाराज ने कहा कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां संस्कृत की सेवा में समर्पित रही हैं और उनके पिता ने संस्कृत प्रचार का जो सपना देखा था, उसे आगे बढ़ाना उनका लक्ष्य है। चिंतामणि महाराज पूर्व में छत्तीसगढ़ संस्कृत बोर्ड के अध्यक्ष रह चुके हैं और वर्तमान में एक संस्कृत महाविद्यालय का संचालन भी कर रहे हैं।
काउंसिल ने संस्कृत को आमजन तक पहुंचाने के लिए 60 दिनों का विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया है। इस कोर्स के अंतर्गत 60 उच्च गुणवत्ता वाले वीडियो तैयार किए जा रहे हैं ताकि कोई भी व्यक्ति घर बैठे संस्कृत सीख सके।
इस परियोजना की नोडल संस्था पटना आईआईटी को बनाया गया है तथा अन्य आईआईटी संस्थानों को भी इससे जोड़ा जा रहा है। उद्देश्य है तकनीक के माध्यम से “हर हाथ मोबाइल” तक संस्कृत शिक्षा पहुंचाना।समाज को सुसंस्कृत एवं संस्कारित बनाना। ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ का मुख्य उद्देश्य है। काउंसिल विशेष रूप से छोटे बच्चों में अनुशासन, संस्कार और संस्कृति के मूल्यों को विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।
रामायण रिसर्च काउंसिल का कि कहना हम आधुनिकता के साथ-साथ पाश्चात्य प्रभाव अपना रहे हैं, इसी कारण काउंसिल के अंतर्गत हम सदैव ‘भारतीय संस्कृत’ की बात करते हैं। हमारी संस्कृति और परंपरा को जीवित रखने के लिए हम भारतीय जीवन-मूल्यों का प्रचार-प्रसार कर रहे हैं। हम मानते हैं कि छोटे बच्चे किसी भी राष्ट्र की धरोहर होते हैं, जिन पर भविष्य निर्भर करता है, इसलिए ‘रामायण मंच’ के माध्यम से बच्चों में अनुशासन और संस्कृति का विकास किया जा रहा है। यह प्रकल्प बच्चों के मन में रामायण आधारित शिक्षा और नैतिकता को गहराई से रोपित करता है। हम देवभाषा संस्कृत का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करना चाहते हैं, इसलिए ”रामायण वार्ता” नामक पत्रिका का संस्कृत में प्रकाशन और प्रसार किया जा रहा है। यह प्रयास संस्कृत को जन-जन की भाषा बनाने की दिशा में उठाया गया एक सशक्त कदम है।
चिंतामणि महाराज ने संस्कृत के विद्वानों से इस अभियान में ‘श्रमदान’ करने की अपील की ताकि अधिक से अधिक लोगों तक भाषा का ज्ञान पहुंच सके। ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ पिछले तीन वर्षों से संस्कृत भाषा में एक पाक्षिक पत्रिका प्रकाशित कर रही है। साथ ही हर वर्ष उत्कृष्ट योगदान देने वालों को ‘संस्कृत भूषण सम्मान’ से सम्मानित किया जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा
