– विधायक स्नेहा दुबे-पंडित, राजन नाईक की मौजूदगी में उच्चस्तरीय बैठक

मुंबई, 10 फरवरी, (हि. स.)। सह्याद्री अतिथिगृह, मलबार हिल, मुंबई में मंगलवार, 10 फरवरी काे महाराष्ट्र के वनमंत्री तथा पालघर जिले के पालकमंत्री गणेश नाईक की अध्यक्षा में वसई-विरार शहर महानगरपालिका (वीवीसीएमसी) क्षेत्र में स्थित मैंग्रोव के संरक्षण और संवर्धन के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण एवं उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में वसई की विधायक स्नेहा दुबे-पंडित, नालासोपारा के विधायक राजन नाईक, वसई के तहसीलदार दीपक गायकवाड सहित वन और महसूल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। साथ ही बैठक में जिलाधिकारी पालघर कार्यालय एवं वसई-विरार शहर महानगरपालिका के वरिष्ठ अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए।बैठक में वसई-विरार शहर महानगरपालिका क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हो रही मैंग्रोव की कटाई की जानकारी स्नेहा दुबे-पंडित ने पालकमंत्री गणेश नाईक सहित सभी वरिष्ठ अधिकारियों को दी और इस पर तत्काल कार्रवाई की मांग की। उन्होंने बताया कि मैंग्रोव की लगातार कटाई और उन पर झोपड़ियों और गोदामों के बनने से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और इससे कुदरती पानी के सोर्स, पानी जमा करने की क्षमता, तटीय इलाकों में बाढ़ कंट्रोल सिस्टम के साथ-साथ स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और रहन-सहन पर भी बुरा असर पड़ रहा है।इस मौके पर विधायक स्नेहा दुबे-पंडित ने यह भी कहा कि मुंबई हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक, मैंग्रोव क्षेत्र को बचाने के लिए जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए और उसके आधार पर इस क्षेत्र की लगातार जांच करने का सिस्टम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि इस मुद्दे पर सरकार की बनाई कमेटी में स्थानीय विधायक को भी शामिल किया जाए और यह कमेटी हर महीने शिकायतों की समीक्षा करे।स्नेहा दुबे-पंडित द्वारा उठाए गए इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए मंत्री गणेश नाइक ने रेवेन्यू, फॉरेस्ट, पुलिस और वीवीसीएमसी की सभी एजेंसियों को विधायक के साथ मिलकर तुरंत मैंग्रोव इलाके का निरीक्षण करने और संबंधित लोगों के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। मंत्री ने गैर-कानूनी तरीके से किए गए भराव को हटाने और वहां मैंग्रोव फिर से उगाने का भी आदेश दिया। इसी तरह विधायक के सुझाव के मुताबिक, उन्होंने अलग-अलग जगहों पर अच्छी सुविधाओं वाले चेकपॉइंट बनाने और मैंग्रोव इलाकों की जगहों पर नजर रखने का आदेश दिया। इस मौके पर गणेश नाइक ने कहा कि मैंग्रोव कुदरत का सुरक्षा कवच है और बाढ़, समुद्री कटाव और पर्यावरण से जुड़ी आपदाओं को रोकने में इसकी भूमिका बहुत अहम है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आदेश दिया कि मैंग्रोव जंगलों की सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख बहुत सख्त है और कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सरकार की मैंग्रोव फॉरेस्ट प्रोटेक्शन स्कीम के तहत वसई के तटीय गांवों के स्थानीय लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए जरूरी कार्रवाई करने का भी निर्देश दिया। बैठक के आखिर में यह तय किया गया कि वसई-विरार शहर महानगरपालका क्षेत्र में मैंग्रोव क्षेत्रों की सुरक्षा और बचाव के लिए सभी संबंधित एजेंसियां मिलकर काम करेंगी।

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार
