कानपुर, 14 मार्च (हि.स.)। वैज्ञानिक शोध का उद्देश्य केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके परिणाम खेत और समाज तक पहुंचने चाहिए। यह बातें शनिवार को भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. गिरीश प्रसाद दीक्षित ने कहीं।

छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांसेस इन लाइफ साइंसेज (आईसीएएलएस-2026) के तीसरे एवं अंतिम दिवस का समापन हुआ। तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने भाग लिया।
सम्मेलन का आयोजन कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक और प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी के मार्गदर्शन में किया गया। प्रो. अवस्थी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित वैज्ञानिक शोध और स्वदेशी वैज्ञानिक डेटा बैंक के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
तीसरे दिन मुख्य वक्ता डॉ. मीनल राठौर ने चना और अरहर की उन्नत खेती तथा रोग-प्रतिरोधी किस्मों के विकास में जीन एडिटिंग और आणविक प्रजनन तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. अनूप कुमार सिंह ने एनआईआर तकनीक आधारित रियल-टाइम फर्मेंटेशन मॉनिटरिंग पर व्याख्यान दिया।
सम्मेलन में 16 विशेषज्ञ वक्ताओं ने व्याख्यान दिए, जबकि 24 मौखिक शोध प्रस्तुतियां और करीब 90 पोस्टर प्रस्तुत किए गए। समापन समारोह में छह सर्वश्रेष्ठ मौखिक प्रस्तुतियों और दस सर्वश्रेष्ठ पोस्टर प्रस्तुतियों को पुरस्कार दिए गए। ओवरऑल बेस्ट पोस्टर प्रेजेंटेशन का पुरस्कार दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर की नीतू सिंह को मिला।
सम्मेलन का आयोजन प्रो. वर्षा गुप्ता के नेतृत्व और डॉ. अनुराधा कलानी के मार्गदर्शन में हुआ, जबकि संयोजक डॉ. राकेश कुमार शर्मा, डॉ. प्रमोद कुमार यादव और डॉ. एकता खरे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसमें 200 से अधिक विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भागीदारी की।
हिन्दुस्थान समाचार / रोहित कश्यप
