धर्मशाला, 26 फ़रवरी (हि.स.)। हिमाचल प्रदेश शिक्षक संघ (एचजीटीयू) की बोर्ड प्रशासन के साथ होने वाली बैठक में बोर्ड अध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा के न आने पर एचजीटीयू ने नाराजगी जताई है। एचजीटीयू के अनुसार बैठक के लिए जारी पत्र में कहा गया था कि बैठक की अध्यक्षता बोर्ड चेयरमैन करेंगे, लेकिन चेयरमैन के न आने पर एचजीटीयू ने नाराजगी जताई है। एचजीटीयू ने पिछली परीक्षाओं का लंबित भुगतान 2 मार्च तक न होने पर परीक्षाओं के बहिष्कार की भी चेतावनी दी है। साथ ही बैठक लंबित भुगतान के संबंध में लिखित आश्वासन देने की भी बात कही है।

संघ के प्रदेशाध्यक्ष वीरेंद्र चौधरी ने बैठक उपरांत पत्रकार वार्ता में कहा कि एचजीटीयू मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह से मिलेंगे और उनसे मांग करेंगे कि शिक्षा बोर्ड का दायित्व किसी शिक्षाविद और ऐसे व्यक्ति को सौंपा जाए जो शिक्षा बोर्ड को अपना समय दे सके। संघ ने कहा कि बोर्ड अध्यक्ष की अध्यक्षता में संघ की बैठक बोर्ड मुख्यालय में प्रस्तावित थी। लेकिन बोर्ड अध्यक्ष इस बैठक में नहीं पहुंचे।

वहीं उन्होंने बोर्ड प्रबंधन को चेतावनी दी है कि अगर दो मार्च तक उनका पिछली परीक्षाओं का लंबित पैसा नहीं दिया तो वह बोर्ड परीक्षाओं का पूरी तरह से बहिष्कार करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी बोर्ड प्रबंधन की होगी। गौरतलब है कि एचजीटीयू की राज्य स्तरीय बैठक शिक्षा बोर्ड कार्यालय धर्मशाला में आयोजित की गई। इसमें प्रदेश भर से आए पदाधिकारियों ने शिक्षकों से जुड़े शैक्षणिक, परीक्षात्मक तथा प्रशासनिक विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य बोर्ड परीक्षाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करना, मूल्यांकन प्रणाली को अधिक वैज्ञानिक एवं न्यायसंगत बनाना, व्यावहारिक परीक्षाओं की निष्पक्ष व्यवस्था स्थापित करना था।
एचजीटीयू ने इस मौके पर विभिन्न मांगों को भी उठाया है।
एचजीटीयू के राज्य प्रेस सचिव डॉ. संजय कुमार ने बताया कि शिक्षा बोर्ड की ओर से डिप्टी सेक्रेटरी राजीव ठाकुर बैठक में उपस्थित रहे। उन्होंने संघ की सभी मांगों को गंभीरता से सुना तथा उनके समाधान के लिए शीघ्र सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया। संघ ने विश्वास व्यक्त किया कि बोर्ड प्रशासन शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के हित में शीघ्र ठोस निर्णय लेकर परीक्षा एवं शिक्षा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया
