जोधपुर, 09 मार्च (हि.स.)। नागौरी गेट के बाहर कागा स्थित प्राचीन शीतला माता मंदिर में मारवाड़ का प्रसिद्ध शीतला माता मेला दस मार्च से शुरू होगा। इस नौ दिवसीय मेले का आगाज मंगलवार शाम 4.30 बजे मुख्य अतिथि राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत व अन्य अतिथि ध्वजारोहण से करेंगे। वहीं बुधवार को अष्टमी पर ठण्डा भोजन ग्रहण किया जाएगा।

मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष निर्मल कच्छवाहा ने बताया कि इस बार मेले की शुरुआत दस मार्च को ध्वजारोहण के साथ की जाएगी। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। मेला अमावस्या तक चलेगा। मंदिर में इस बार श्रद्धालुओं की सुविधार्थ विकास कार्य करवाए गए हैं। मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए पॉलीथिन का प्रयोग प्रतिबंधित रहेगा। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस व्यवस्था के अलावा ट्रस्ट प्रशासन ने स्वयंसेवकों की टीमों का भी गठन किया है। मेले के संबंध में व्यवस्थाओं को लेकर अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। मंदिर में 24 घंटे दर्शनों के लिए पुजारियों की अलग-अलग टीमों का भी किया गया। इसके अलावा सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी टीमों का गठन किया गया है। मंदिर परिसर को पॉलिथिन से मुक्त रखा जाएगा।
शीतला माता पूजन वैसे तो चैत्र कृष्ण पक्ष की सप्तमी को होता है लेकिन केवल जोधपुर में दूसरे दिन अष्टमी को मां शीतला का पूजन किया जाता है। इसका प्रमुख कारण विक्रम संवत 1826 में सप्तमी के दिन तत्कालीन जोधपुर के महाराजा विजयसिंह के महाराज कुमार की मृत्यु होने से जोधपुर सहित मारवाड़ के विभिन्न क्षेत्रों में अक्ता रखने की परपरा है।
समूचे मारवाड़ में अष्टमी के दिन शीतला माता पूजन के बाद पूरे दिन ठंडा भोजन बतौर माता की प्रसादी ग्रहण किया जाता है। शीतला अष्टमी के एक दिन पूर्व घरों में अलग अलग व्यंजन बनाए जाएंगे।
खासतौर पर करबा, राब, पंचकूटे की सब्जी, मठरी, दहीबड़े, कांजी-बड़े, मीठी नमकीन पुडियां आदि व्यंजनों को मां शीतला, ओरीमाता, अचपड़ाजी एवं पंथवारी माता पूजन व भोग के बाद अष्टमी पर बतौर प्रसादी के रूप में ग्रहण की जाएगी।
इस पर्व का धार्मिक के साथ-साथ स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ महत्व भी है। शीतला माता की पूजा करने से चेचक, खसरा, चिकनपॉक्स और मौसमी संक्रमण जैसी बीमारियों से रक्षा होती है। प्राचीन समय में जब चिकित्सा सुविधाएं सीमित थीं, तब लोग शीतला माता की पूजा को रोगों से बचाव का आध्यात्मिक उपाय मानते थे। धार्मिक ग्रंथों में शीतला माता को रोगों को शांत करने वाली देवी के रूप में वर्णित किया गया है। यही कारण है कि इस दिन लोग विशेष रूप से स्वच्छता और शीतलता से जुड़े नियमों का पालन करते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश
