जम्मू, 21 फ़रवरी (हि.स.)। सात दिवसीय राष्ट्रीय कला कार्यशाला ‘आदि शंकराचार्य संसार’ का तीसरा दिन आज 43 बटालियन मुख्यालय सीआरपीएफ, जिला पुलिस लाइन बडगाम में रचनात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक भावनाओं के साथ संपन्न हुआ। इस कार्यशाला का आयोजन मास्टर संसार चंद बारू मेमोरियल चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया जा रहा है। तीसरे दिन प्रतिभागियों ने ऐतिहासिक शंकराचार्य मंदिर, कश्मीर की आध्यात्मिक विरासत और अद्वैत वेदांत की शिक्षाओं से प्रेरित लाइव कैनवास पर सृजन किया। गोपाद्री पहाड़ी पर स्थित यह प्राचीन मंदिर श्रीनगर और डल झील के विहंगम दृश्य के साथ कश्मीर की दार्शनिक परंपरा का प्रतीक है।

कार्यशाला में श्रीनगर से मोहम्मद इरफान भट, मोहम्मद सुहैल खान, उमैद नियाज़ रेशी, सैयद मुरसलीन और सुहैब अहमद हकीम के साथ दिल्ली की शर्मिला शर्मा और कोलकाता के अपूर्वा कराती भाग ले रहे हैं। प्रतिभागियों में जामिया सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के ललित कला के शोधार्थी और स्नातकोत्तर विद्यार्थी शामिल हैं। एमएससीबीएमसी ट्रस्ट की अध्यक्ष अनुराधा ऋषि ने कहा कि कला केवल अभिव्यक्ति नहीं बल्कि आत्मिक यात्रा है जो एकता, शांति और सकारात्मक सोच का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के मंच रचनात्मकता के साथ-साथ चरित्र निर्माण और सांस्कृतिक समन्वय को भी सशक्त करते हैं।

कार्यशाला में चित्रकला सत्रों के अलावा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। समापन पर श्रीनगर में आदि शंकराचार्य की विरासत को समर्पित कलाकृतियों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल शर्मा
