श्रीनगर, 14 मार्च (हि.स.)। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने आज जनता से आत्मनिरीक्षण करने और सामाजिक प्रगति में योगदान देने का आह्वान किया। उपराज्यपाल ने कहा कि स्वयं से पूछिए, मैं अपने समुदाय के लिए क्या कर रहा हूँ? मैं जनता के लिए क्या विरासत बना रहा हूँ? मैं आने वाली पीढ़ियों के लिए क्या धरोहर छोड़ना चाहता हूँ? आपके भीतर के उत्तर ही हमारे भविष्य को नया आकार देंगे।

उपराज्यपाल श्रीनगर के मीडिया कॉम्प्लेक्स स्थित डीआईपीआर सभागार में पुस्तक “महसूस-सामाजिक परिवर्तन की कहानियाँ” के विमोचन समारोह में बोल रहे थे। यह पुस्तक सेवा भारती जम्मू-कश्मीर और एकल विद्यालय फाउंडेशन ऑफ इंडिया के स्वयंसेवकों द्वारा किए गए निस्वार्थ सेवा और परिवर्तनकारी सामाजिक पहलों की प्रेरक जमीनी कहानियों को उजागर करती है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक जनता के लिए प्रेरणादायक गाथाएँ हैं। मैं चाहता हूँ कि सेवा भारती के बलिदानों, एकल विद्यालय के समर्पण, स्वयंसेवकों की प्रतिबद्धता और हमारे समुदायों में आए परिवर्तन की ये कहानियाँ जम्मू-कश्मीर से परे तक पहुँचें और पूरे भारत में अनगिनत स्वयंसेवकों को प्रेरित करें।
उपराज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में उज्ज्वल भविष्य के निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में प्राकृतिक संपदा, ऊर्जावान युवा और सेवाभाव से परिपूर्ण नागरिक हैं। उन्होंने कहा कि महान भविष्य भाग्य से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प और सामूहिक प्रयासों से बनता है। समृद्ध जम्मू-कश्मीर की परिभाषा केवल आर्थिक मापदंडों से नहीं बल्कि हर नागरिक के लिए सुलभ जीवन स्तर से होगी।
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर को एक अनुकरणीय और अग्रणी केंद्र शासित प्रदेश बनाने के लिए पांच संकल्पों – सामाजिक सद्भाव, परिवार जागरूकता, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक कर्तव्य और आत्मनिर्भरता – पर बल दिया।
पहला संकल्प सामाजिक सद्भाव है और मैं सभी नागरिकों से धैर्य और साहस के साथ एकजुट होने का आग्रह करता हूं ताकि समुदायों के बीच आपसी सम्मान को बढ़ावा देकर पीढ़ियों, संस्कृतियों, धर्मों और विचारों के बीच सेतु बनाया जा सके। दूसरा, परिवारों को मूलभूत मूल्यों में दृढ़ रहना चाहिए, जागरूक और सशक्त होकर अगली पीढ़ी के भविष्य को आकार देना चाहिए। तीसरा संकल्प पर्यावरण संरक्षण है। जम्मू कश्मीर, पृथ्वी का स्वर्ग, प्रकृति का अनूठा उपहार है – इसकी नदियां, पहाड़ और जंगल हमें याद दिलाते हैं कि हम अमूल्य विरासत के संरक्षक हैं। सतत विकास ही सच्ची दूरदर्शिता है; आइए हम सब मिलकर इस विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें। चौथा संकल्प नागरिक कर्तव्य है। नागरिकों को व्यवस्था को साझा भागीदारी वाली व्यवस्था में विकसित करना चाहिए। एक सशक्त लोकतंत्र वहीं फलता-फूलता है जहां लोग सक्रिय, जागरूक और जवाबदेह होते हैं। पांचवां संकल्प आत्मनिर्भरता है। हमें दूसरों को सशक्त बनाते हुए जरूरतों को पूरा करने के लिए क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। आइए हम आर्थिक रूप से मजबूत बनें, सतत प्रगति के लिए संसाधनों का प्रबंधन करें। उन्होंने कहा कि ये पांच संकल्प केवल विचार नहीं हैं बल्कि मजबूत सामाजिक-आर्थिक विकास सुनिश्चित करने के लिए हमारा सामूहिक दायित्व हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / बलवान सिंह
