
अररिया, 08 फरवरी(हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में रविवार को फारबिसगंज के भागकोहलिया स्थित विद्या मंदिर में हिंदू सम्मेलन का आयोजन रविवार को किया गया। सम्मेलन में सैकड़ों की संख्या में माता-बहनें, प्रबुद्धजन एवं स्वयंसेवक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्रबोध को सुदृढ़ करना रहा।

कार्यक्रम की प्रस्तावना एवं उद्बोधन विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य आशुतोष कुमार मिश्र ने किया। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीयता के मूल तत्वों स्वभाषा, भूषा, भजन एवं भ्रमण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि इन्हीं के माध्यम से भारतीय संस्कृति और संस्कारों की रक्षा संभव है। उन्होंने युवाओं से भारतीय जीवन मूल्यों को आत्मसात करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अधिवक्ता किशोर दास ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ को अपने कार्यकाल में कई बार प्रतिबंधों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन राष्ट्रसेवा का कार्य कभी रुका नहीं। उन्होंने कहा कि शाखाओं के माध्यम से छोटे बच्चों में संस्कारों का बीजारोपण किया जाता है और यही संस्कार संघ की शताब्दी यात्रा की आधारशिला हैं।
इस अवसर पर संघ द्वारा पंच परिवर्तन के माध्यम से समाज को पांच महत्वपूर्ण विषय सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण, कुटुंब प्रबोधन, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्य को अपनाने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने हिंदू समाज से जाति और वर्ग से ऊपर उठकर सनातनी भाव से एकजुट होने की अपील की।
धन्यवाद ज्ञापन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला कार्यवाह ओम प्रकाश शर्मा ने किया। कार्यक्रम का समापन नागरिक कर्तव्य बोध के संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर सह विभाग संघ चालक रामकुमार केसरी, विश्व हिंदू परिषद के मोहन दास, नगर व्यवस्था प्रमुख बटेशनाथ मंडल, उदय ठाकुर, चंचल सिंह, मनोज झा, सुनील कुमार, कमलेश झा, लक्ष्मीकांत झा, आर्यन कुमार सहित सैकड़ों लोग उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार ठाकुर
